योगीराज आया रे (व्यंग)


– देवेन्द्रराज सुथार

         कसम से योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनते देख हमें तो बड़ी ही जलन होने लगी है और बहुत से हमारे गुंडे-मव्वाली भाईयों को भयंकर अतिसार होना लगा है। यहां तक कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी इस पीड़ा से बच नहीं पाये। खौफनाक मंसूबों को मन में पालने वाले व मानवता का नंगा नाच दिखाने वाले उन तमाम लोगों के शरीर के कलपुर्जे ढीले पड़ने लग गये है। अलबत्ता योगी के राजयोग के कारण बहुतों की रोजी रोटी पर संकट मंडराने लग गया है। योगी के मुख्यमंत्री बनने से पहले गुंडे-मव्वाली, चोर-चक्के रोजना यत्र-अत्र-सर्वत्र हाथ मारकर अच्छा खासा कमा लेते थे। लेकिन अब तो योगी की इस सुनामी ने उनके सारे धंधे की ही वाट लगा दी है।

साथ ही योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन लोगों के आंसू रुक ही नहीं पा रहे है जो बेचारे पशुओं की गर्दन काट कर अपना पेट भरते थे। लेकिन जब से उन लोगों ने बूचड़खानों के बंद होने की बात सुनी है तब से उनकी पूरी फैमिली छाती कूट-कूटकर रुद्धन-क्रंदन करने लग गई है। बच्चों को स्कूल की फीस चुकाने की चिंता सताने लग गई है। क्योंकि इनके घर में तो पशुओं की गर्दन कटने से ही होली, दिवाली और खुशहाली आती थी। लेकिन अब तो सारे माहौल्ल में मातम पसरा है। यह समझ नहीं आता है – पशुओं को काटना इतना नागवार किसी को क्यूं गुजरता है ? इतिहास में भी तो आदिमानव पशुओं का शिकार कर अपना पेट भरता था। और आज भी भरना चाह रहा है तो योगी जैसों को मंजूर क्यूं नहीं ? क्योंकि अब आदिमानव की जगह चिंतशील मानव ने ले ली है। यदि यह सच है और आधुनिक मानव चिंतशील और संवेदनशील प्राणी कहलाता है तो वो आये दिन हैवानियत की हदें लाघंती हरकतें कौन करता है ?

खैर ! योगी आदित्यनाथ पक्के कट्टर हिन्दूवादी नेता और अब मुख्यमंत्री है। इनकी बयानबाजी एक तबके को अति उत्साहित करने और दूसरे की कंपकंपी छुड़ाने वाली रही है। क्रोधित मुद्राधारी योगी अब जो ताडंव नृत्य दिखायेंगे उसे सारा हिन्दुस्तान ही नहीं, विश्व भी देख कर दंग रह जायेगा। वो मतदाता जो हमारी तरह सहिष्णुता और इंसानियत धर्म की आराधना करते है, उनको यह नये मुख्यमंत्री साहब इतने जल्दी हजम नहीं हो पायेंगे। और क्या मुख्यमंत्री की शपथ के साथ ही योगी आदित्यनाथ पूरी तरह से बदल जायेंगे ? यदि बदल जाते है तो यह इतिहास की यादगार घटना होंगी। क्यूंकि शपथ तो औपचारिकता और केवल मात्र रस्म अदायगी होती है। कटु सत्य तो यह है कि निष्पक्षता और पारदर्शी शासन बनाने की कसम खाने वाले नेता ही बारह के भाव में जेल में गेहूं पीस रहे हैं। गधा कितना भी बूढा क्यू ंना हो जायें वो लात मारना नहीं छोडता !

अजीब है अपना देश। यहां योगी तेल, साबुन, ज्यूस और च्यवनप्राश बेचने के साथ ही सत्ता के उच्च पद को भी बड़ी ही आसानी से सुशोभित कर जाते है। वाकई ! कपड़े -कपड़े में भी कितना है फेर। यदि बदन पर आ जायें केसरिया रंग तो हो जायें सारी मेहर। शनैः-शनैः हो रहा योगियों का सत्ता की तरफ झुकाव कई इटली और रोम की तरह धर्म सुधार आंदोलन और पुर्नजागरण को नियंत्रण तो नहीं दे रहा है ? क्यूंकि मध्य यूरोप में आधुनिक दुनिया को निर्मित्त करने वाले यह आंदोलन इन्हीं कारणों और हालातों की परिणीति थे।

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