‘एसीबी’ (ACB) के कारण मुकाबला हैं त्रिकोणीय


     चुनाव चिन्ह ‘सीटी’ भी दिल्ली में होने वाली नगरपालिका के रण में कूद चुकी हैं, जिसने 5 साल के अंतराल में आखिर अपनी पार्टी बनाई. साल 2012 में योगेंद्र यादव ने भारत में हो रहे भ्रष्ट्राचार के खिलाफ जंग छेड़ी और लोकपाल लाने की मांग की. दरअसल, चुनाव चिन्ह ‘सीटी’ योगेंद्र यादव की नवीनतम पार्टी स्वराज इंडिया पार्टी का हैं. इस कारणवश, दिल्ली के मैदान अब चुनाव चार-कोणीय बनता दिख रहा हैं. लेकिन शायद दिल्ली की जनता स्वराज पार्टी को इस चुनाव में ज्यादा महत्ता न देकर इस मुकाबले को त्रिकोणीय माध्यम से देखें. देखा जाए तो मुकाबला अभी सिर्फ तीनो (आप, कांग्रेस और भाजपा,अर्थात  A C B) पार्टियों का ही है. लेकिन शायद लोकपाल की मांग को लेकर राजनीति में दाखिल हुई स्वराज पार्टी कही दिल्ली की जनता की पहली पसंद न बन जाए, जैसा जनता ने केजरीवाल को प्रचंड़ बहुमत दिया था. वरन, पार्टी इसी रूप रेखा को ध्यान  में रखते हुए चुनाव की दिशा में आगे में बढ रही हैं. वहीं अगर बात करें ‘आप’ पार्टी की तो राजोरी गार्डन में हुए उपचुनाव के नतीजों ने केजरीवाल की पार्टी को एक भीतरी पटखनी दी हैं और जिसका असर शायद केजरीवाल को हो भी रहा हैं. पर क्या ‘आप’ की यह हार उनके राजनितिक करियर के अंत का बिगुल तो नही. दिल्ली की जनता ने ‘आप’ को जितने महा-बहुमत के द्वारा दिल्ली सल्तनत सौंपी थी, लेकिन पार्टी ने दूसरे राज्यों मे भी अपनी बिसात बिछाने के ईरादे से दिल्ली को बेहाल छोड़ पंजाब औप गोवा की ओर रूख किया, लेकिन नतीजों ने केजरीवाल की पार्टी को हराया. शायद पार्टी ने चुनावी माहौल को बखूबी न समझा.

        लंबे वक्त से कांग्रेस मे कार्यरत रहे अरविंदर सिंह लवली ने कल भाजपा का दामन थाम लिया. लेकिन इसे एक नेता का अपनी पार्टी के लिए कोई अति बलशाली संकेत हैं, जिसे काग्रेस सूंघ नही पा रही हैं. लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का कहना हैं कि लवली डर के कारण दलबदलू हो गए. कांग्रेस को पंजाब में उसकी करारी जीत के लिए बधाई देनी चाहिए. जो पार्टी के लिए एक नई उर्जा का विकल्प हैं. वही अगर बात करें भाजपा, जिसने चार राज्यों मे अपनी सरकार बहुमत द्वारा बनाई. भाजपा भी बधाई के पात्र हैं. अब ऐसे में भाजपा का पूरा ध्यान अब दिल्ली की नगरपालिका के चुनाव में हैं. वैसे भी भाजपा ने मुंबई एमसीडी चुनाव में करारी जीत हासिल की हैं, जो उसके लिए एक नया विकल्प हैं.

         जैसे-जैसे तारीखें बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे दिल्ली में चुनावी पारा भी बढ़ रहा हैं. पर क्या किसी ने नगरपालिका की हालत देखी, कैसा जर्जर हालत मे आज एमसीडी को ला खड़ा किया हैं राजनेताओं ने भ्रष्ट्राचार के द्वारा. सभी पार्टियों ने नगरपालिका को सुचारू रूप से चलाने के लिए घोषणा-पत्र को जनता के सामने रख दिया हैं. पर क्या किसी भी पार्टी ने भी अपने चुनावी घोषणा-पत्र मे अपने कुछ 1-2 (शायद मुझे नही पता)   कामों का जिक्र किया, जिससे हम और आप समझ सकें कि वाकई में इस पार्टी ने नगरपालिका के लिए काम किया हैं.

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