धर्म के नाम पर पलते पाखंडी बाबा


     { धर्म की आड़ में  पाखंडी बाबाओं के पनपने से समाज में अत्याचार, अनाचार को भी बढ़ावा मिलता  है. धूर्त और पाखंडी बाबा को पनपने से रोकने के लिए आम जनता को जागरूक होना पड़ेगा किसी व्यक्ति को गुरु मानने से पूर्व भावनाओं में न बहते हुए उसका निष्पक्ष विश्लेषण अवश्य कर लेना चाहिए ताकि एक सद्गुरु का चयन किया जा सके.चंद पाखंडी लोग धर्म और सम्पूर्ण समाज को बदनाम करते हैं. देश के नेतृत्व को भी इनको पनपने से रोकने के लिए अभीष्ट उपाय करने चाहिए.}

पाखंडी बाबा

         ईश्वर और धर्म एक आस्था का विषय है,क्योंकि ईश्वर के अस्तित्व को लेकर अनेक प्रकार के विवाद हो सकते हैं परन्तु आस्था किसी तर्क को मान्यता नहीं देती. हमारे देश में भी धर्म को अनेकों रूप में देखा जा सकता है,शायद संत महात्माओं और उपदेशकों की जितनी बड़ी फौज हमारे समाज में है,किसी अन्य धर्म या सम्प्रदाय में नहीं है.संतो की विराट संख्या के अतिरिक्त भी अनेक लाखों लोग धर्म से जुड़े कार्यों में संलग्न है और वे अपनी जीविका का साधन बनाये हुए हैं. अनेक लोग जनता को धार्मिक भय दिखा कर धन बटोरने का उपक्रम करते हैं. जैसे माँ भगवती जागरण के लिए चन्दे की वसूली, भंडारे के लिए धन एकत्रीकरण,कावड सेवा के लिए धन संग्रह इत्यादि कुछ लोग तो  सिर्फ धन को एकत्र करने के बहाने ढूढते है, ताकि वे अपने खर्चे भी पूरे कर सकें तो कुछ लोग अपने शौक पूरे करने के लिए इस प्रकार के धार्मिक कार्यों में जुड़ते हैं.ये लोग धर्म के नाम पर वसूली के लिए  कभी धर्म भय, कभी जबरन,कभी गुंडा गर्दी के हथकंडे अपनाते हैं, व्यापारियों, दुकानदारों,व्यवसायियों,कारखाने मालिकों  से कभी उनकी इच्छा और कभी उनकी इच्छा के विरुद्ध धन की वसूली करते हैं.

    कुछ लोग गेरुवे वस्त्र धारण कर कमंडल हाथ में लेकर निकल पड़ते है अपनी भिक्षा यात्रा पर ,चंद रटे रटाये नारे या प्रवचन सुनाकर दानदाता को प्रभावित करते हैं.जब कभी कोई व्यक्ति उन्हें दान देने में आनाकानी करता है, तो साधू को अपमानित कर लौटने का अभिशाप झेलने का वास्ता देकर भयभीत करते हैं, इस प्रकार से सामने वाले को धर्म संकट में डाल कर दक्षिणा देने को मजबूर करते हैं.कभी कभी तो अत्यधिक श्रद्धालू दानदाता साधू के रूप में आये व्यक्ति के चरण स्पर्श भी करता है, इस प्रकार सम्मान मुफ्त में मिलता है. इससे बढ़िया कोई और कारोबार  हो सकता है क्या? ईश्वर या अल्लाह के नाम पर आशीर्वाद देते जाओ और झोली भरते जाओ और मान  सम्मान मुफ्त में पाओ.

       कुछ लोग हाथी  लेकर किसी भी मोहल्ले में पहुँच जाते हैं और हाथी वाले बाबा के नाम  पर जनता की श्रद्धा का नकदीकरण करते हैं.इसी प्रकार अनेक लोग सिर्फ शानिदान का धंधा अपनाये हुए हैं जो सिर्फ शनिवार के दिन भिक्षा पात्र उठा चल पड़ते हैं और दिन भर के संग्रह  से पूरे सप्ताह का गुजारा करते हैं.कभी कभी जब ग्रहण पड़ता है तो अतिरिक्त कमाई हो जाती है.बिना काम काज के पूरे हफ्ते मौज मस्ती बस.

   आजकल कुछ विद्वान लोग और कुछ कपटी लोग भी संत या बाबा बन जाते है और अपनी तीक्ष्ण बुद्धि का प्रयोग कर जनता में अपनी धाक जमा लेते हैं और फिर धन  एकत्र करते है. ऐसे लोगों का कहना है की यदि वे प्रशासनिक सेवा में भी होते तो इतना मान सम्मान और दौलत नहीं पा सकते थे, राजनेताओं की तर्कहीन बातों के लिए जी हुजूरी अलग से करनी पड़ती. जबकि यहाँ अल्प समय में ही करोडो की माया के मालिक बन जाते हैं, बड़े बड़े विद्वान्,बड़े बड़े पदाधिकारी,बड़े बड़े राजनैतिक नेता भी उनके समक्ष नत मस्तक होते हैं. जो किसी भी अन्य कारोबार या व्यवसाय  में सम्भव नहीं होता. जनता धर्म के नाम पर सब कुछ लुटाने को आसानी से तैयार हो जाती है.

      जनता की धार्मिक भावना का लाभ कुछ चालाक,धूर्त लोग भी उठा लेते हैं और जनता में अपना भारी बर्चस्व बना लेते हैं,कभी कभी तो ऐसे पाखंडियों के अनुयायी करोड़ों में पहुँच जाते हैं. ऐसे अनेक पाखंडी बाबाओं को राजनैतिक संरक्षण भी प्राप्त होने लगता है क्योंकि वे अपने समर्थकों की भारी संख्या बल के कारण सत्ता में परिवर्तन करने की क्षमता रखते हैं. फिर शुरू होता है इनका घिनौना अत्याचारी खेल अर्थात वे हत्या और बलात्कार जैसे कारनामे बेखौफ होकर करने लगते हैं.

     आज नित्य प्रति अनेक बाबाओं के काले कारनामे मीडिया द्वारा उजागर किये जा रहे हैं. जब कभी किसी बाबा के काले कारनामे जनता के समक्ष आते हैं तो जनता (अनुयायी) अपने को ठगा हुआ अनुभव करती है. अब तो न्यायालयों में भी इनके दोष सिद्ध हो रहे हैं. आशा राम, राम रहीम जैसे उदाहरण बिलकुल ताजातरीन उदाहरण हैं.इसी प्रकार पूर्व में भी अनेक पाखंडी या दुराचारी संत उजागर होते रहे हैं.

         ईश्वर ,या अल्लाह किसी का भला करे या न करे, इन मुफ्त खोरो तथाकथित संतों, बाबाओं,साधुओं, पडिया, पंडितों की जीविका का साधन अवश्य बन जाते हैं.धर्म भीरु जनता इनके लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अपनी जेबे खाली करती रहती है, अन्धविश्वास में आकर इन्हें जीविका चलाने के अवसर प्रदान करती है,साथ ही धर्म की आड़ में तांत्रिकों ,पाखंडी बाबाओं के पनपने से समाज में अत्याचार, अनाचार को भी बढ़ावा मिलता  है. धूर्त और पाखंडी बाबा को पनपने से रोकने के लिए आम जनता को जागरूक होना पड़ेगा किसी व्यक्ति को गुरु मानने से पूर्व भावनाओं में न बहते हुए उसका निष्पक्ष विश्लेषण अवश्य कर लेना चाहिए ताकि एक सद्गुरु का चयन किया जा सके.चंद पाखंडी लोग धर्म और सम्पूर्ण समाज को बदनाम करते हैं.देश के नेतृत्व को भी इनको पनपने से रोकने के लिए अभीष्ट उपाय करने चाहिए.

आज का समाज ———

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