… कहीं लक्ष्य से तो नहीं भटक गई युवा आबादी


      किसी भी देश की अर्थव्यवस्था उस देश की रीढ़ होती है। इस अर्थव्यस्था में सभी क्षेत्रों की हिस्सेदारी होती है। लेकिन, इन सब के अलावा एक सबसे बड़ा फैक्टर उस देश की युवा आबादी होती है। इन्हीं युवाओं के कंधों पर देश को आगे बढ़ाने का भार होता है। वर्तमान परिपेक्ष्य में देखा जाए तो अभी विश्व की सबसे युवा आबादी भारत की है। भारत की आबादी कि औसत उम्र अभी 27.9 वर्ष है। इस लिहाज से देखा जाए तो अभी 20 साल तक पूरे विश्व में भारत का दबदबा रहने वाला है। भारत की आबादी की औसत आयु 2037 तक 33.6 फीसद हो जाएगी। जबकि अन्य देश की आबादी बूढ़ी होती जाएगी। इसी युवा के भरोसे भारत आज पूरे विश्व में अपना परचम लहराने की सोच रहा है। जहां 2030 तक पूरे विश्व में युवाओं की भागीदारी 29.23 फीसद होगी वहीं भारत में युवाओं की भागीदारी 32.26 फीसद होगी। इस हिसाब से देखा जाए तो भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर हो रहा है। लेकिन, यह सब निर्भर इस बात पर करता है कि युवा आबादी (15-34) अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल किस क्षेत्र में और कैसे करती है? यह सब एक परिकल्पना है जो विश्व और देश कि युवाओं की रुचि और ऊर्जा के आधार पर तय होती है। ऐसे में भारत को भी अपनी युवा आबादी से काफी कुछ अपेक्षाएं होंगी।

      लेकिन वर्तमान में देश कि युवा आबादी जिस तरह इंटरनेट, सोशल मीडिया, फेसबुक और वाट्सएप पर पॉलिटिकल डिबेट, भड़काऊ पोस्ट डालने में अपनी ऊर्जा खत्म करती जा रही है, वह काफी चिंतनीय है। इससे देश को नुकसान तो आखिरी पर स्तर पर होगा, लेकिन युवा अपना भविष्य और अपने मां-बाप के सपनों पर पहले पानी फेर रहे हैं। किसी घटना पर सोशल मीडिया पर ऐसे उत्तेजित हो जा रहे हैं कि मरने-मारने पर उतारू हो जा रहे हैं। किसी को बिना सोचे-समझे उसके बारे में जाने बिना उसे हिरो बता दे रहे हैं। कुछ महीने पहले कि घटना का ही संदर्भ लें- राजसमंद में एक बंगाली मजदूर अफराजुल की बर्बरता से शंभु नाम का एक युवक हत्या करता है, उसका वीडियो बनाता और उस बेकसूर अफराजुल को लव जिहाद का नाम देकर धर्म विशेष का अगुआ बनने लगता है। उस हत्यारे शंभु को युवा बिना मामले की तफशीश किए हिरो बना देते हैं। सोशल मीडिया पर हर घर से शंभु निकलेगा ट्रोल होने लगता है। उसे धर्म विशेष का हिरो बना दिया जाता है, कुछ महीने बाद पता चलता है कि वह उसी लड़की से नाजायज संबंध रखता था और अपने इस कुकृत्य को छिपाने के लिए एक बेकसूर मजदूर की हत्या कर देता है। ऐसे अनेकों उदाहरण पड़े है, जब युवा बिना किसी चीज को जाने-समझे अपनी राय बना लेते हैं। आज फेसबुक पर देखा कि रिया शर्मा नाम का कोई फर्जी आईडी, पोस्ट था- आपका नंबर मिलेगा रात अकेले में कॉल करने के लिए.. लाइक, शेयर कर के जवाब दो। यह देखकर आश्चर्य हुआ कि उस पोस्ट को 3700 लाइक, 406 कमेंट और 209 शेयर मिले थे। इसमें 90 फीसदी लाइक, शेयर और कमेंट उसी युवा आबादी (15-34) की है जिसके दम पर हर देश इतराता है। रात में(1-2 बजे) ऑफिस से आने के बाद जब भी फेसबुक ओपन करता हूं 10-20 युवा (फ्रेंड) ऑनलाइन दिखते हैं। इतनी रात को इसमें प्रतिशत युवा ही होंगे जो बहुत जरूरी काम कर रहे होंगे। बाकी सब सोशल मीडिया पर वक्त बर्बाद कर रहे होते हैं। ऐसे में यह चिंता की बात है कि हमारी युवा आबादी किस ओर जा रही है। क्या वर्तमान कि युवा आबादी अपने लक्ष्य से भटक गई। शताब्दियों बाद हर देश के पास एक मौका आता है जब उसकी आबादी युवा होती है। यह युवा आबादी लगभग 30 साल रहती है। जिनके कंधों पर देश का भार होता है। भारत अपने 10 युवा साल गुजार चुका है। उसके पास अब सिर्फ 20 साल बचे हैं। ऐसे में अगर इन युवाओं को रास्ते पर नहीं लाया गया तो देश की अर्थव्यस्था के साथ तो खिलवाड़ होगा ही इसका परिणाम व्यक्तिगत तौर पर उसी युवाओं को ही भुगतना होगा। लेकिन, जब उसे अपनी इस गलती का अहसास होगा तब तक उसकी उम्र युवा अवस्था को पार कर चुकी होगी।

लेखक ;-

मो. तौहिद आलम।

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