अव्यवस्थित सरकारी कार्य प्रणाली


    अंजलि रूहेला द्वारा प्रेषित

       हमारे देश में भले ही आज कितनी ही योजनाएँ चल रही हैं और सरकारी कामकाज कितना ही कम्प्यूटरीकृत हो गया हो लेकिन सच यही है कि देश पिछड़ रहा है,और इस पिछड़ेपन के लिए कोई एक व्यक्ति जिम्मेदार नहीं है पूरा सिस्टम ही खराब है,सारी व्यवस्था ही कुछ ऐसी है जिसका न कोई सिर है न पैर।
एक तरफ बेरोजगारी इतनी बढ़ रही है कि बेरोजगार  आत्महत्या करने पर उतर आये हैं और दूसरी तरफ जहाँ काम है वो कोई भी विभाग हो,उसमें स्टाफ की कमी होने के कारण काम समय से नहीं होता है देश के अन्दर जितने भी अलग अलग प्रकार के विभाग हैं, चाहे वो किसी भी कार्य से सम्बन्धित हैं उनके कार्य अधूरे ही पड़े हैं ,चाहे वो किसी भी विभाग को ले लो।
कुछ विभागों की जानकारी तो आम आदमी को है ही नहीं कि वो किस काम से सम्बन्धित हैं, लेकिन जो जगजाहिर विभाग हैं जिससे लोगों को अपने दैनिक जीवन के काम पूरे कराने होते हैं वहाँ भी आधे पद खाली पड़े हैं जैसे:- बिजली विभाग के ऑफिस मे रोज पता नहीं  कितने लोग सुबह को जाते हैं और शाम को बिना काम पूरा हुए वापस आ जाते हैं। लापरवाही विद्धुत विभाग की है लेकिन परेशानी का सामना करना पड़ता है आम आदमी को, कई बार तो बिजली उपभोक्त्ता टाइम से अपना बिजली बिल भुगतान कर देते हैं लेकिन इन्फॉर्मेशन अपडेट ना होने के कारण बिल अगले महीने फिर जुड़कर आ जाता है और फिर कब ठीक होगा वो तो राम भरोसे……
ऐसा ही हाल हमारे न्याय के मंदिर कोर्ट का है, ना जाने कितने मामले कोर्ट मे लांबित हैं, लोग मर जाते हैं लेकिन कोर्ट मे केस नहीं मरता है।अगली पीढ़ी को उस केस का हिसाब देखना होता है मामला किसी का, और भुगते कोई । दूसरी तरफ लॉं डिग्री लिए हुए कितने ही बेरोजगार लोग हैं।कोर्ट कचहरी में हजारों पद खाली पड़े हैं।सरकार के कान पर कोई जूं तक नहीं रेंगती है।
बेरोजगारी बढ़ने से चोरी डकैती व अन्य अपराध भी बढ़ते हैं। क्योंकि पेट भरने के लिए कुछ तो करेंगे ही चाहे वह काम वैध काम हो या फिर अवैध काम क्योंकि पेट की आग वैध अवैध का ज्यादा दिन तक इंतजार नहीं करती है।इस तरह के और भी ना जाने कितने उदाहरण हैं जो देश व्यवस्था को गड्डे में डाल रहे हैं ।अगर ये व्यवस्था सही ढंग से संचालित नहीं की गयी तो देश के हालात को बद से बदतर होने से कोई  नहीं बचा पाएगा।
इस व्यवस्था को धीरे धीरे पटरी पर लाया जा सकता है लेकिन सबके सहयोग से…जिसमें देश के नागरिक और देश की सरकारें चाहे फिर वो केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार क्योंकि नियम उन्हीं को बनाने हैं।तय समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश अगर विभागों को मिल जाएं, तो व्यवस्था दुरुस्त होने से कोई रोक नहीं पाएगा और देश में ये जो अव्यवस्था फैली है वो सब ठीक हो जाएगी। लेकिन अगर हमारी सरकारें इस तरफ ध्यान दें तब…।

अंजलि रूहेला
अम्बैहटा पीर

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