अवनी की उड़ान बेमिसाल


        मध्यप्रदेश की रहने वाली अवनी चतुर्वेदी ने भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमान पायलट के रूप में मिग-21 फाइटर जेट से खुले आसमान में अकेले ही उड़ान भरकर ‘पहली स्वतंत्र फाइटर पायलट’ होने का गौरव प्राप्त किया। यह भारतीय वायुसेना और पूरे देश के लिए एक विशेष उपलब्धि है। क्योंकि दुनिया के चुनिंदा देशों जैसे ब्रिटेन, अमेरिका, इजरायल  में ही महिलाएं फाइटर पायलट बन सकती हैं। हमारे लिए गर्व की बात हैं कि अब यह उपलब्धि हासिल करने वाले देशों में भारत भी शामिल हो गया हैं। यकीनन ! अवनी चतुर्वेदी की इस कामियाबी ने महिलाओं के सामर्थ्य, साहस व कौशल का एक नया परिचय दिया हैं। इसी नारी नेतृत्व क्षमता का हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी जिक्र किया था। जिसमें अवनी चतुर्वेदी का नाम भी शामिल था।imageedit_4_9399051867
       आपको बता दें कि अवनी चतुर्वेदी, भावना कंठ और मोहना सिंह ने मार्च में ही लड़ाकू विमान उड़ाने की योग्यता हासिल कर ली थी। इसके बाद उन्हें युद्धक विमान उड़ाने का गहन प्रशिक्षण दिया गया। यह पहला मौका होगा जब भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान की कॉकपिट में कोई महिला बैठेगी। वायुसेना में करीब 1500 महिलाएं हैं, जो अलग-अलग विभागों में काम कर रही हैं। 1991 से ही महिलाएं हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ा रही हैं, लेकिन फाइटर प्लेन से उन्हें दूर रखा जाता था। लेकिन, वर्ष 2015 में सरकार ने वायुसेना पायलटों में महिलाओं को शामिल करने का मन बनाया था। इसके बाद वर्ष 2016 में पहली बार तीन महिलाओं अवनी चतुर्वेदी, राजस्थान की मोहना सिंह और बिहार की भावना कंठ को वायुसेना में कमीशन दिया गया। जिसमें अवनी चतुर्वेदी भाग्यशाली रही कि उसे सबसे पहले युद्धक विमान उड़ाने का मौका मिल गया। इस मौके पर अवनी कहती है – ‘किसी का सपना होता है कि वो उड़ान भरें। अगर आप आसमान की ओर देखते हैं तो पंछी की तरह उड़ने का मन करता है। आवाज की स्पीड में उड़ना एक सपना होता है और अगर ये मौका मिलता है तो एक सपना पूरे होने के सरीखा है।’ अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान कक्षा दसवीं और बारहवीं में अव्वल रहने वाली अवनी चतुर्वेदी ने राजस्थान के टॉक जिले में वनस्थली विद्यापीठ से कंप्यूटर साइंस की डिग्री हासिल की है। अवनी अपना आदर्श अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला को बताती  है।
       निःसंदेह आज देश में बेटियां नित्य नई कामियाबी के कीर्तिमान रच रही हैं। जिसको देखकर लड़कियों के प्रति पराये पन की धारणा बदलनी चाहिए थी, वो अभी तक पूरी तरह से नहीं बदल पाई है। हाल ही में नीति आयोग ने ‘स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत’ शीर्षक वाली एक रिपोर्ट में देश के 21 बड़े राज्यों में से 17 राज्यों में जन्म के समय लिंगानुपात में गिरावट दर्ज की है। जो कि समाज के भविष्य पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। आसमान से सितारे तोड़ने का हुनर रखने वाली बेटियों को पैदा करने से आखिर दुनिया क्यों डर रही है ? आज जब बेटियां आसमान में नया इतिहास लिख रही है तो उन्हें स्कूल जाने से क्यों रोका जा रहा हैं ? अवनी चतुर्वेदी की इस कामियाबी से उन लोगों की धारणा बदलेगी कि जो बेटियों को कागज समझने की भूल कर बैठते हैं। जो उनको बराबरी का हक देने की खिलाफत करते है। साथ ही, कई लड़कियों का आत्मविश्वास रूढ़िवादी और पुरापंथी मानसिकता ने मार दिया, वे इससे प्रेरणा लेकर सपने देखना शुरू करेगी। चलते-चलते, आसमानों से कह दो की हमारी उड़ान देखनी हैं तो अपना कद और ऊँचा कर ले !
– देवेंद्रराज सुथार 
स्थानीय पता – गांधी चौक, आतमणावास, बागरा, जिला-जालोर, राजस्थान। पिन कोड – 343025
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