ये पैसा बोलता है।


        जैसा कि उक्त पंक्ति से बिल्कुल साफ है कि वर्तमान युग पूर्ण रूप से रुपयों पैसों पर आश्रित एक युग हो गया है। वर्तमान की तुलना में पहले के समय में रुपए-पैसे के साथ-साथ इंसानियत को भी महत्वता दी जाती थी। किंतु वर्तमान समय में मात्र एक मात्र रुपए को ही महत्वता दी जाती है। आजकल के लोग रुपए पैसों की तुलना में इंसानियत को भूल ही चुके हैं। लोगों के लिए रुपया पैसा मानो एक भगवान हो गया हो । वैसे यदि इस बात पर विचार किया जाए तो यह बात काफी हद तक सही भी है। आजकल के समय में छोटे से लेकर बड़ा काम चाहे वह काम सरकारी हो या गैर सरकारी । रुपए पैसे देने से हो ही जाता है । चाहे मामला आरटीओ ऑफिस का हो या फिर चालान काटने से बचने का पैसा अपनी वाणी सुना कर इंसान को बचा ही लेता है। जी हां वैसे तो रुपया पैसा एक कागज मात्र है लेकिन यकीन मानिए जनाब यह बोलता भी है और जब यह बोलता है तो अच्छे अच्छे दिग्गजों की बोलती बंद कर देता है। रुपये पैसे का जोर दिखा कर हर इंसान अपने आप को बहुत बड़ा दिग्गज मानता है। रुपए-पैसे के रॉब में आकर इंसान ने मानो इंसानियत ही छोड़ दी है। उदाहरण के लिए पहले के समय में यदि कोई व्यक्ति दुर्घटना ग्रस्त होता था तो अन्य व्यक्ति इंसानियत के नाते उस व्यक्ति की जान बचाने का प्रयास करता था । किंतु यदि आज के समय में कोई व्यक्ति सड़क पर चोटिल होता है तो अन्य व्यक्ति उसे बचाने की नहीं बल्कि उस चोटिल व घायल व्यक्ति के धन को अपना धन बनाने की कोशिश करते हैं । आजकल के समय में इंसानियत नाम मात्र की देखी जा सकती है। मैं यह बिल्कुल नहीं कहूंगा इस दुनिया में निवास करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के हृदय से इंसानियत गायब हो गई है , लेकिन हां प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में इंसानियत है ऐसा कहना गलत होगा। वर्तमान समय में व्यक्ति ने रुपये पैसे को ही अपना सब कुछ मान के रखा हुआ है । समस्त रिश्ते नाते , दोस्त , परिवारजन आदि सभी से बढ़कर रूपए पैसे को अहमियत दी जाती है।

       आजकल देखा जा रहा है के समाज में जिस व्यक्ति के पास ज्यादा रुपया पैसा है सारा समाज उसी व्यक्ति के आगे पीछे दौड़ता नजर आता है । समाज उस व्यक्ति की छवि ना देख कर उसके रुपए पैसे के पीछे भागता है। आजकल के समय में आपको तब तक पूछा जाता है जब तक आपकी जेब रुपए पैसों से भरी होती हैं।कोई यह जानने का प्रयास नहीं करता की उसने धन नैतिक रूप से कमाया है या अनैतिक तरीके से अर्थात धोखा धड़ी ,भ्रष्टाचार,लूट पाट या किसी असामाजिक कार्य द्वारा| जहां रुपए-पैसे ने आपका साथ छोड़ा वहां ज्यादातर सभी लोग आपका साथ छोड़ कर चले जाते हैं। मैं सोशल एक्टिविस्ट व आरटीआई एक्टिविस्ट इंडिया स्टार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स धारक अमन सिंह अंत में बस यही कहना चाहूंगा कि रुपए-पैसे को उसके स्थान पर ही रहने दें उसको अपना सब कुछ बनाने की कोशिश ना करें। रुपए पैसों को शांत मुद्रा में ही रहने दे उनको एक वाणी प्रदान ना करें।

लेखक अमन सिंह
(सोशल एक्टिविस्ट व आरटीआई एक्टिविस्ट)
(इंडिया स्टार बुक ऑफ रिकॉर्ड होल्डर)
प्रेमनगर , बरेली , उत्तर प्रदेश
मो. 8265876348

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