पेंशनर्स को चाहिए इनकम टैक्स में राहत


प्रस्तुत विषय को समझने के लिए पेंशनर्स के संगठन(Pensioners welfare Association Allahabad)  द्वारा जारी निम्न आवेदन पत्र  की जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है

NO INCOME TAX FOR PENSIONERS!!!!

 All retiree members please initiate a movement – every retired person

after rendering  30 to 36 years of service to the Govt or the Deptt where he worked  and for all his services the Deptt pay him salary which is ofcourse treated as income and is liable for income tax. But  after retirement he is paid pension as a supperanuation fund for his livelihood on account of serving for so many years. Here a question arise as to whether why Income Tax is levied on pension. This is not an income for any services or work. This is only a defered wage by the Deptt  to the employee who have served the Deptt  for so many years. Then why Income tax . Raise your voice and let it reach the Govt to discontinue the levy of Income tax on pension.  If  MPs & MLAs pension is not taxable why our pension is Taxed Pass on this message  to 20 of your friends  with request to further passon .Let the Pensioners community & Civil society  know the facts.

 R.S Varma IAS Rtd.

President Govt.Pensioners

Welfare Association.Alld.

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     एसोसिएशन का तर्क है की पेंशनर्स को दी जाने वाली पेंशन कोई व्यक्ति की इनकम नहीं मानी  जा सकती, क्योंकि पेंशन  सरकारी सेवाओं से निवृत कर्मियों को  भरण पोषण के लिए दी जाने वाली राशि है. अतः इन पर इनकम  टैक्स   लगाना उचित नहीं है. उक्त वक्तव्य को समझने के लिए यह आवश्यक है की यह समझा जाय की  पेंशन की परिभाषा क्या है? इसकी उत्पत्ति के पीछे  उद्देश्य क्या था? इसका अस्तित्व क्यों आया क्यों एक सरकारी कर्मी को पेंशन देने की व्यवस्था की गयी?

पेंशन की परिभाषा;

    अंग्रेजों के शासन काल में जब कोई सरकारी कर्मी सेवानिवृत होता था, तो कर्मचारी को अंग्रेजों(अंग्रेजी सरकार )  की सेवा के बदले एक मुश्त राशि दे दी जाती थी, ताकि वह अपने भावी जीवन के लिए भरण पोषण की व्यवस्था कर सके (कोई भी कारोबार करके या कहीं उक्त उपलब्ध कराई गयी राशि को निवेश करके अपनी आमदनी कर सके ). परन्तु अक्सर यह देखा जाता था कर्मचारी को दी गयी, राशि किसी पारिवारिक कार्य(बेटी या बेटे के विवाह इत्यादि) में खर्च हो जाती थी, या  मकान बनाने में खर्च हो जाती थी.तत्पश्चात सेवानिवृत व्यक्ति आर्थिक रूप से परिवार पर या संतान पर   निर्भर हो जाता था, जो स्वयं उसके लिए सम्मान जनक नहीं होता था. और यदि संतान ने अपना रुख भी सहयोगात्मक नहीं दिखाया, तो बुजुर्ग के लिए शेष जीवन व्यतीत करना बहुत ही कष्ट दायक हो जाता था। कभी कभी तो भीख मांगने तक की नौबत आ जाती थी.इन परिस्थितियों को समझते हुए  पेंशन की व्यवस्था की गयी, ताकि परिवार से कोई सहयोग न भी मिले तो भी सरकारी कर्मी का जीवन निर्वाह अंत तक सम्मान  पूर्वक व्यतीत   हो सके अर्थात पेंशन का अर्थ है की विषम परिस्थितियों में भी सेवानिवृत कर्मी की न्यूनतम आवश्यकतों की पूर्ती होती रहे. यहाँ पर यह भी समझना आवश्यक है सभी सेवा निवृत कर्मी विषम परिस्थितियों का शिकार नहीं होते. किसी भी परिस्थिति में उसे अपमानित न होना पड़े. पेंशन का अर्थ यह कदापि नहीं है की पेंशन उपभोक्ता को दुनिया या समाज की सभी सुख सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।

इनकम टैक्स का उद्देश्य;

    आजादी के पश्चात् सरकार द्वारा प्रत्येक नागरिक की आय को सीमित करने के लिए इनकम टेक्स की अवधारणा बनायी गयी, जिसका उद्देश्य था किसी भी स्तर पर धन का अधिक संग्रह न होने पाए अतः जिसकी आय न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ती से अधिक होती है, उससे इनकम टैक्स वसूल किया जाता है. उद्देश्य रहता है कि देश में समानता लायी जा सके अमीर गरीब के अंतर को सीमित किया जा सके. आय कर छूट की दरें समाज और देश की अर्थव्यवस्था के अनुरूप समय समय पर परिवर्तित की जाती हैं. ताकि निम्न आय प्राप्त व्यक्ति इनकम टेक्स के दायरे से बाहर  रहे ,गरीब व्यक्ति का शोषण न हो पाए।

         उपरोक्त सभी तथ्यों के अनुसार जो व्यक्ति आयकर छूट सीमा से अधिक इनकम करता है वह गरीब नहीं होता। और जो निम्न आय वर्ग के अंतर्गत नहीं आता वह लाचार और गरीब नहीं हो सकता।  अतः यदि किसी व्यक्ति को पेंशन के रूप में न्यूनतम आयकर सीमा से अधिक पेंशन मिलती है तो वह जनता के साथ अन्याय है, उसके द्वारा दी गई टैक्स  की राशि को पेंशनर्स  की विलासी आवश्यकताओं  की पूर्ती के लिए खर्च किया  जाय ,और उन्हें उपलब्ध कराई  राशि पर इनकम टैक्स  भी न लगे तो यह तो देश जनता को लूटना ही है. और पेंशनर्स की माँग अव्यवाहरिक और अन्याय पूर्ण है. शेष बुजुर्गों(जो आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है और पेंशन धारी नहीं हैं) के साथ अन्याय  है, कष्टकारी है, शोषण कारी है.

      इनकम टैक्स की वर्तमान दरों के अनुसार ढाई लाख सालना आय आयकर के दायरे से बाहर है अर्थात २० हजार मासिक आये प्राप्त करने वाला व्यक्ति आयकर से बाहर रहता है, इसलिए पेंशन की अधिकतम सीमा भी बीस हजार मासिक होनी चाहिए। परन्तु आज बड़े पदों से सेवा निवृत हुए पेंशनर्स को एक एक लाख तक पेंशन मिल रही है जो कितना न्याय संगत  मानी  जा सकती है? उस पर उनकी मांग है की उन्हें इनकम टैक्स  से राहत दी जाय। जिससे यह लगता है इन बड़े अफसरों के अतिरिक्त अन्य जनता को जीने का अधिकार ही नहीं है.जनता की जेब काट कर इन्हे सारी सुविधाएँ प्रदान कर दी जायँ।

        कभी यह मांग क्यों नहीं की जाती की एक व्यापारी जिसके द्वारा उपलब्ध कराये गए कर के रूप में प्राप्त राजस्व से ही देश की सरकार चलती है, देश में विकास कार्य होते हैं. परन्तु जब वह कमाने लायक नहीं रहता तो उसे सरकार भरण पोषण के लिए कुछ नहीं दे पाती, जब सरकार एक गरीब देश की सरकार होती है, जो बुजुर्ग व्यापारी को भरण पोषण के लायक भी साधन उपलब्ध नहीं करा सकती।व्यापारी ने भी अपने कार्यकारी  समय में सरकार की सेवा की है(राजस्व  संग्रह कर)..क्या उसे जीने का अधिकार नहीं है? क्या  परिवार या उसकी संतान उसके बुढ़ापे में हमेशा सहयोगी साबित होती है? क्या वह कभी विषम परिस्थितियों का शिकार नहीं होता? क्या उसके लिए भरण  पोषण की सुरक्षा की कोई व्यवस्था है?क्या उसे न्यूनतम आवश्यकताओं की आपूर्ति  के लिए सरकार से अपेक्षा रखना अनुचित है? दूसरी तरफ ऐसे वरिष्ठ नागरिक भी हैं जिन्होंने किसी निजी संस्थान में कार्य किया है उन्हें बहुत ही कम पेंशन नसीब हो पाती  है, जो जीवन भर श्रमिक कार्य करते रहे हैं या बहुत ही छोटे स्तर पर निजी कारोबार करते रहे हैं जैसे रिक्शा चलाना, ठेला लगाना,बेलदारी मजदूरी करना इत्यादि उन्हें बुजुर्ग हो जाने पर या असमर्थ हो जाने पर जीविका की समस्या बन जाती है, क्या वे देश के नागरिक नहीं हैं. क्या उनके भरण पोषण के लिए सरकार को कोई व्यवस्था नहीं करनी चाहिए?

       अंत में निष्कर्ष निकलता है सरकारी कर्मियों को आयकर छूट सीमा से अधिक पेंशन नहीं दी जानी  चाहिए, इस प्रकार से बची शेष राजस्व से करोड़ों व्यापारियों,कारोबारियों,श्रमिकों की आजीविका चल सकेगी और पेंशनर्स को  आयकर रिटर्न जमा करने की चिंता भी  नहीं करनी पड़ेगी।

 

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