मीडिया को और अधिक सक्रिय होना चाहिए.


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       हमारे दैनिक जीवन में अक्सर  अनेक प्रकार की दुर्घटनाओं की जानकारी मिलती रहती है, जिनमे सड़क हादसे, पुल गिरने के हादसे, रेल हादसे, आगजनी की घटनाएँ इत्यादि. अक्सर जब भी हम दुर्घटना की खबर समाचर पत्रों या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा प्राप्त करते हैं, तो उनमे बताया जाता है, की अमुख व्यक्ति या फर्म या सरकारी विभागों की लापरवाही के कारण ही यह हादसा हुआ यदि सुरक्षा के मानकों  का पालन किया गया होता, तो हादसे को टाला जा सकता था, अनेक जीवन बचाए जा सकते थे. घायलों की संख्या घटाई जा सकती थी या किसी भी प्रकार की आर्थिक हानि से बचा जा सकता था. मीडिया वाले आम तौर पर इवेंट व्यवस्थापक(ORGANIZAR), या व्यापारिक प्रतिष्ठान के व्यवस्थापकों को नियमों की अनदेखी का इल्जाम लगाते हैं, जिसमें सरकारी विभागों की मिली भगत की आशंका व्यक्त की जाती रहती है. परन्तु क्या इल्जाम लगाकर ही मीडिया की भूमिका समाप्त हो जाती है? क्या हादसे के शिकार व्यक्तियों के प्रति जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है? क्या इस प्रकार से भविष्य के हादसों को टाला जा सकता है?

   यदि मीडिया अपनी सक्रियता बढ़ा दे तो अवश्य ही इस प्रकार के हादसों को रोका जा सकता है,इस सन्दर्भ में मेरे भी कुछ सुझाव हैं यदि उन पर मीडिया अपनी सक्रियता दिखाए तो अवश्य ही हादसों पर अंकुश लगाया जा सकता है और कोई भी व्यापारी, कारोबारी, या सरकारी विभाग कर्मी जान-माल की सुरक्षा को लेकर नियमों की अनदेखी, लापरवाही या लाल फीताशाही नहीं कर पायेगा.

    जब भी कोई छोटा मेला, बड़ा मेला, प्रदर्शनी, सिनेमा या अन्य कोई आयोजन किया जा रहा हो, भारी निर्माण कार्य चल रहा हो, मीडिया वाले अपनी निजी रूचि दिखा कर बिजली सम्बन्धी, अग्नि शमन सम्बन्धी, निर्माण सम्बन्धी, जिनमे जानमाल के नुकसान की आशंका हो और व्यवस्थापकों द्वारा सुरक्षा मानकों के नियमों में लापरवाही बरती जा रही हो,उसमे स्वयं संज्ञान लें. मीडिया वाले पहले से ही या समय रहते त्रुटियों को  उजागर करें और जनता को विस्तार से किसी स्थान पर बरती जा रही लापरवाही की व्याख्या कर अवगत कराएँ,तो व्यवस्थापक सुरक्षा मानकों की अनदेखी नहीं कर पायेगा. हो सकता है कोई एक मीडिया वाला व्यवस्थापक(ORGANIZAR) से धन प्राप्त कर लापरवाही को दबा दे, परन्तु जब बहुत सारे मीडिया वाले इन ख़बरों को जनता के समक्ष लाने को प्रयासरत रहेंगे तो व्यवस्थापक का इतना धन खर्च हो जायेगा कि उसे अनेक विभागों को और पूरी मीडिया लोबी को धन देने के मुकाबले नियमों का पालन करना अधिक सस्ता और आसान लगेगा और वह सभी नियमों का पालन करने में अपना हित मानेगा. और निरपराध जनता हादसों के शिकार होने से बच पायेगी. सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी या सुरक्षा नियमों के पालन में होने वाली लापरवाही से जनता को काफी हद तक मुक्ति मिल सकेगी. इस प्रकार से जनता की सुरक्षा मीडिया द्वारा सुनिश्चित की जा सकती है.(SA-224B)

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