अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस औपचारिकता मात्र क्यों ?


       (प्रेषक –अमन सिंह )

         जैसा कि हम सभी को मालूम है कि बीते दिनांक 21 जून 2018 को चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया ।भारत के वर्तमान यशस्वी माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा संपूर्ण विश्व में योग को अपनाने के संबंध में अनेक प्रेरणाएं व अनेक गाथाएं चर्चित हैं। वर्तमान की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में व्यक्ति अपने शरीर को फिट रखने का टाइम बिल्कुल भी नहीं निकाल पाता है। हमारे संपूर्ण विश्व में दो प्रकार के लोग निवास करते हैं । एक तो वे लोग जो अपना कार्य शांति से करना पसंद करते हैं तथा दूसरे वह लोग जो कि अपने काम को समाज के सामने प्रचार व प्रसार के माध्यम से करना पसंद करते हैं। यदि बात योग दिवस की करें तो एक तो वह लोग जो साल के 365 दिन योग करते हैं तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार का प्रचार व प्रसार पसंद नहीं करते. वहीं दूसरी और वह लोग जो साल में सिर्फ एक दिन यानी कि 21 जून को सिर्फ और सिर्फ योग इसलिए करते हैं कि उनको औपचरिकता स्वरूप उस दिन योग करते हुए अपनी फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड करनी होती है। ऐसे लोग सिर्फ और सिर्फ समाज में अपनी प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए वर्ष में सिर्फ एक दिन योग को अपनाना पसंद करते हैं। वही ठीक इसके विपरीत वह लोग जो सिर्फ और सिर्फ अपनी सेहत के बारे में सोचते हैं तथा बिना किसी प्रचार प्रसार व  लोभ लालच के प्रतिदिन नियमित व सुचारू रूप से योग करना पसंद करते हैं । मैं यह बिल्कुल नहीं कहूंगा कि विश्व के समस्त व्यक्ति गलत हैं, लेकिन हां सभी व्यक्ति प्रतिदिन व नियमित बिना किसी प्रचार-प्रसार के योग करते हैं यह बात भी सही नहीं है। बात यदि हम अपने मंत्रियों और विधायकों की करें तो काफी हद तक कुछ आदरणीय व सम्मानीय मंत्रीगण , सांसद व विधायक ऐसे हैं जो सिर्फ और सिर्फ भारत के वर्तमान यशस्वी माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कहने पर वर्ष में सिर्फ और सिर्फ एक दिन योग करने का ढोंग अवश्य करते हैं । आखिरकार उनको भी आज के दिन योग करके उस फोटो को सोशल मीडिया पर अपलोड करके मोदी जी के पास आज के दिन योग करने की अपनी हाजिरी दर्ज करानी होती है । आखिर हाजिरी दर्ज कराएं भी क्यों नहीं पद पर बने रहने  का जो सवाल है ।aman-singh

     ना जाने लोग योग से इतना घबराते क्यों है। जिस प्रकार हम प्रतिदिन समस्त नित्यक्रिया करते हैं भोजन करते हैं ठीक उसी प्रकार हमें अपने दैनिक जीवन में योग के लिए भी समय अवश्य निकालना पड़ेगा। यह बात भी सही है पहले छः माह तक आपको अपने आपको योग करने के लिए प्रेरित  करना होगा तत्पश्चात यह शरीर आपको योग करने  के लिए बाध्य करेगा,यह आपकी आदतों में शामिल हो चुका होगा.यदि किसी दिन आप योग के लिए समय निकलने से चूक जाते हैं तो स्वयं आपके अन्दर से आवाज आयेगी की आपने आज कुछ मिस कर दिया है.जब आप एक बार नियमित योग करने  लगते हैं तो अनेक रोगों से आप मुक्त होने लगते हैं. स्वयं को रोग मुक्त रखने के लिए कम से कम आधा घंटा तो अपने व्यस्त समय में से निकाल ही सकते हैं.

लेखक-अमन सिंह

(सोशल एक्टिविस्ट व आरटीआई एक्टिविस्ट)

(इंडिया स्टार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर)

(उत्तर प्रदेश बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर)

प्रेमनगर , बरेली , उत्तर प्रदेश

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