इमरान खान के सामने चुनौती


     प्रधानमंत्री पद की गोपनीयता शपथ लेने के बाद अब पूर्व क्रिकेटर और पीटीआई प्रमुख इमरान खान का पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने का सपना पूूूूरा हो गया है। वे अब संवैधानिक रूप से पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री बन गये हैं। उम्मीद जतायी जा रही है इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने से भारत पाकिस्तान के संबंधों में सकारात्मक सुधार आएगा। ऐसी उम्मीद इसलिए जतायी जा रही है कि इमरान खान ने मीडिया को बताया है कि उनकी प्राथमिकता गरीबों के लिए पेटभर भोजन, मुफ्त शिक्षा, चिकित्सा, मजदूरों को काम व नौजवानों को उच्च शिक्षा के साथ रोजगार प्रदान करने में रहेगी। वहीं उन्होंने कश्मीर मसले को बातचीत के जरिये हल करने की बात भी कहीं है। उनका कहना है कि कश्मीर मसला सेना से नहीं बल्कि आपसी संवाद से समाधान के कगार पर पहुंचेगा।
imran khan
     दरअसल, ऐसा बयान हर पाकिस्तान का नवचयनित प्रधानमंत्री देता आया है। सर्वविदित है कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री सेना के हाथ की कठपुतली से ज्यादा कुछ भी नहीं है। वहां सेना की मर्जी चलती है, उसका कहा आदेश अध्यादेश बन जाता है। इसका ज्वलंत उदाहरण नवाज शरीफ हैं, जो एक समय सेना के सबसे प्रिय नेता थे, लेकिन सेना के साथ मतभेद बढ़ने पर आज उनका क्या हश्र हुआ, यह सबके सामने है। इसलिए भारत को अधिक उम्मीद नहीं जतानी चाहिए कि वहां की सेना जिसकी मूल भावना भारत विरोधी की रही है, वह इमरान खान को दोनों देशों के रिश्तें सुधारने के लिए खुली छूट देगी। पाकिस्तान की सेना यह कभी नहीं चाहेगी कि भारत पाकिस्तान का तनावपूर्ण संबंध खत्म हो जाएं और उसे अपने सालों से बने बनाये वर्चस्व से हाथ धोने पड़े।
      सच्चाई तो यह है कि इमरान खान की सरकार इतनी ताकतवर भी नहीं होगी कि वह मुल्क चला सके, भारत पाकिस्तान के संबंधों को सुधारने की बात दूर रही। क्योंकि वर्तमान में पाकिस्तान की आधी से अधिक आबादी गरीबी में जीवन बरस करने को विवश है। पाकिस्तान के लोगों के बीच में व्यापक मतभेद हैं और कानून की हालत खस्ता बनी हुई है। दीगर, पाकिस्तान के सामने आर्थिक चुनौतियों भी कम नहीं हैं। यह सही है पाकिस्तान में इमरान खान की छवि ईमानदार नेता की हैं और लोग उन्हें चाहते हैं। लेकिन, इन विषम हालातों में उनके सामने यह चुनौतीपूर्ण से कम काम नहीं होगा कि वे देश की आंतरिक स्थिति में परिवर्तन के लिए क्या रणनीति बनाते है। उन्हें सबसे पहले देशवासियों में भरोसे का माहौल पैदा करने पर जोर देना होगा। देश को तरक्की के रास्ते ले जाने के लिए दशहत व आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करना पड़ेगा। ऐसा इसलिए भी जरूरी है कि बाहरी इन्वेस्टर पूंजी तभी लगाएंगे, जब पाकिस्तान में एक बेहतर माहौल होगा। इसलिए इन्वेस्टरों को लुभाने के लिए इमरान को आंतकवाद तो खत्म करना ही पड़ेगा।
       साथ ही, देश में उद्योग लगाने के लिए बिजली और सड़क जैसी सुविधाओं को माकूल बनाना होगा। सस्ती बिजली केवल और केवल परमाणु बिजली से हो पायेगी, इसके लिए उन्हें पड़ोसी देशों को विश्वास दिलाना पड़ेगा कि उनसे मिले यूरेनियम को वो केवल बिजली के लिए इस्तेमाल करेंगे। ये काम इमरान के लिए उतना ही मुश्किल है जीतना जमीन और आसमान को एक कर देना।
लेखक – देवेन्द्रराज सुथार
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