कानून मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद जी से निवेदन


श्रीमान जी, आज देश के आम नागरिकसमेत कोई भी बड़े से बड़ा नेता देश के प्रधान मंत्री को अपमान जनक तरीके से कुछ भीबोल देता है. राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता एक अलग विषय है पार्टियों के कार्यकर्त्ताया नेता अपनी बात रखने के लिए स्वतन्त्र हो सकते हैं, परन्तु देश के प्रधान मंत्रीके लिए अपशब्द का प्रयोग सर्वथा वर्जित होना चाहिए. प्रधानमंत्री किसी पार्टी कानेता नहीं होता वह पूरे देश का नेता होता है यदि देश का कोई भी नागरिक उनके लिएअपशब्दों का प्रयोग  करता है तो वह पूरेदेश का अपमान करता है और विश्व में देश की छवि को धूमिल करता  है. अतः इसे रोका जाना आवश्यक है. नीच, चोर, मौत का सौदागर जैसेशब्दों से देश अपमानित होता है.

          वैसे तो राजनीति के स्तर को भी सुधारने की आवश्यकता है कोई भी नेता या कार्यकर्त्ता किसी के लिए भी गली गलौज का प्रयोग न करे सिर्फ जनता के समक्ष अपने जन कल्याणकारी कार्यक्रमों को पेश करे, किसी पार्टी या व्यक्ति विशेष पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला बंद होना चाहिए. इससे जनता बेहद आहत हो चुकी है. जब भी संचार माध्यमों पर कोई भी कम्पनी अपने उत्पाद का  प्रचार करती है तो वह सिर्फ अपने उत्पाद की तारीफ करती है, वह किसी भी अन्य  उत्पाद के विरुद्ध कुछ नहीं बोल सकती यह प्रचार का नियम है तो फिर राजनीति जैसे महत्वपूर्ण  क्षेत्र में एक दूसरे पर आक्षेप करने से रोकने के लिए भी नियम और कानून बनना चाहिए.

     एक अन्य बदलाव लाने की भी आवश्यकता है मीडिया किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति पर की गयी अभद्र टिप्पड़ी का प्रसारण करता है तो उसके विरुद्ध भी कार्यवाही हो.जितना अपमान अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाला करता है उससे अनेक गुना अधिक मीडिया कर देता है.

      अतः मंत्री जी से निवेदन है, एक ऐसे शक्तिशाली कानून का निर्माण कर पास कराएँ जिसके अंतर्गत कम से कम देश के प्रधान मंत्री,राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति व अन्य गणमान्य व्यक्तियों  के लिए कोई भी अपमानजनक शब्द न कह पाए. मीडिया अभद्र टिप्पड़ियों को प्रसारित न कर पाए.  वैसे तो राजनीति में ही आरोप प्रत्यारोप और आक्षेप बंद किये जाने चाहिए. जनता को आशा है आप इस विषय पर गंभीरता से  विचार करेंगे और यथा संभव उपाय कर देश की गरिमा की रक्षा करेंगे.        

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2 thoughts on “कानून मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद जी से निवेदन

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