तुच्छ राजनीति


    “वर्त्तमान विपक्षी नेताओं की हालत बिलकुल खिसियानी बिल्ली जैसी हो रही है.शायद वे समझते हैं सत्ता के अधिकारी सिर्फ वे ही हैं. अतः किसी अन्य पार्टी की सरकार को सहन कर पाना उनके लिए असंभव हो रहा है और इसी सोच के चलते वे सत्तारूढ़ पार्टी को सत्ता से हटाने के लिए सब कुछ करने को तैयार हो रहे हैं. अपने कुतर्कों के जाल में फंसा  कर जनता से वोट अपने पक्ष के कर लेने को आतुर हैं. आज की जनता तीन दशक पूर्व की जनता के मुकाबले अधिक पढ़ी लिखी और समझदार है.जिसे अपने शब्द जाल में फंसाना अब आसान नहीं है. अब सत्यता और इमानदारी की राजनीति करने वाले ही सत्ता तक पहुँच पाएंगे.”

हमारे देश में  लोकतांत्रिक  व्यवस्था है, जिसमे जनता द्वारा सरकार का चुनाव होता है.सभी राजनैतिक दलों को अपने पक्ष में वोट प्राप्त करने के लिए नेताओं को अपने संकल्पों और अपने कार्यशैली को जनता के समक्ष रखना होता है, जिस पार्टी के  पक्ष में जनता अधिकतम वोट करती है वही देश, प्रदेश एवं पंचायतों में अपनी  सत्ता चलाने का अधिकारी होता है, और जनता के लिए, जनता के हित में कार्य करता है. जिस पार्टी के कम प्रतिनिधि चुन कर जाते हैं वे विपक्षी पार्टी का रोल निभाते हैं और सरकार के कार्यों पर अपनी पैनी नजर रखते हैं, ताकि सरकार जनहित के कार्यों से विचलित न हो पाए और सभी कार्यों को संविधान और कानूनों के अनुरूप कर रहे हैं अथवा नहीं. परन्तु कुछ नेता अपने स्वार्थ में या अपने राजनैतिक भविष्य की चिंता में सरकार का और सरकार के कार्यों का विरोध करते समय यह भो भूल जाते हैं की वे सरकार का विरोध करते करते अपने देश या राष्ट्र हितों का विरोध करने लगते हैं. जिसके कारण देश में अव्यवस्था या अराजकता और उसकी सुरक्षा को भी खतरा हो जाता है. परन्तु वे जान बूझ कर यह सब करते हैं. क्या उनको  यह  नहीं सोचना चाहिए की यदि देश या राष्ट्र ही सुरक्षित नहीं रहेगा तो वे कहाँ रहेंगे, उन्हें  भी उसी समाज और देश में अपना जीवन गुजरना है, यदि वे सत्ता में भी आते हैं तो अपने साथ ढेरों प्रकार की विसंगतियों को ले आएंगे और उनके लिए सत्ता का सञ्चालन करना आसान नहीं होगा. आखिर ऐसी सत्ता से क्या लाभ जब देश गर्त में जाने को तैयार हो. यदि विपक्ष में भी रहते हैं तो भी यदि देश और समाज सुरक्षित नहीं है तो उनके लिए भी जीवन यापन असह्य होगा. एक नागरिक होने के नाते किसी भी नेता को अपनी राजनीति के स्तर को इतना नीचे नहीं गिरा देना चाहिए, जिसके कारण उन्हें अपना भविष्य कष्टदायक हो जाय.क्या यह समझदारी है की जिस डाल पर वे भी बैठे हैं, उसी डाल पर कुल्हाड़ी चलाकर उसे काट दी जाय.

       वर्त्तमान विपक्षी नेताओं की हालत बिलकुल खिसियानी बिल्ली जैसी हो रही है.शायद वे समझते हैं सत्ता के अधिकारी सिर्फ वे ही हैं. अतः किसी अन्य पार्टी की सरकार को सहन कर पाना उनके लिए असंभव हो रहा है और इसी सोच के चलते वे सत्तारूढ़ पार्टी को सत्ता से हटाने के लिए सब कुछ करने को तैयार हो रहे हैं. अपने कुतर्कों के जाल में फंसा  कर जनता से वोट अपने पक्ष के कर लेने को आतुर हैं. आज की जनता तीन दशक पूर्व की जनता के मुकाबले अधिक पढ़ी लिखी और समझदार है.जिसे अपने शब्द जाल में फंसाना अब आसान नहीं है. अब सत्यता और इमानदारी की राजनीति करने वाले ही सत्ता तक पहुँच पाएंगे.

      गत लोक सभा चुनावों में जनता ने विरोधी पार्टियों को स्पष्ट सन्देश दे दिया है की अब वह भ्रष्ट कपटी, बाहुबलियों को सत्ता तक नहीं पहुंचाएगी. यदि अब भी वे जनता को पूर्व की भांति भ्रमित कर चुनावी संग्राम को जीत लेने  का भ्रम पाले हुए हैं, तो उनका राजनैतिक भविष्य की कब्र खुदना पक्का है. आज जो भी जनता समाज और देश के सुनहरे भविष्य के लिए कार्य करेगा वही सत्ता के गलियारों तक पहुँच पायेगा. जो नेता समाज और देश  की सेवा करने के लिए राजनीति में आयेगा वही देश का शासक बन सकेगा. राजनीति को कमाई का माध्यम समझने वाले अब सत्ता से दूर ही रहेंगे. भाई भतीजावाद और परिवार वाद अब संभव नहीं हो पायेगा. योग्य,सच्चा समाज सेवक,और कर्मठ व्यक्ति ही जनता की नजरों में उभर सकेगा.

     अतः यदि अब किसी वर्तमान विपक्षी पार्टी के नेता को राजनीति में बने रहना है तो उसके लिए  अपनी कार्यशैली को बदल कर ही आगे बढ़ने की सम्भावना हो सकती है.जनता के समक्ष सकारात्मक तथ्य रखकर और सत्य पर आधारित राजनीति से ही अपने भविष्य को संवार पाने की उम्मीद की जा सकती है. (SA-248B)        


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