डेंगू – जागरूकता, बचाव और रोकथाम के उपाय।


प्रेषक —- घनश्याम बैरागी  भिलाई  ( छत्तीसगढ़ ) 

आम नागरिकों को बाल्टी में पनपे डेंगू के लार्वा दिखाते हुए ब्रीडिंग चेकर्स दस्ता

सुंदर नीलकमल और मनीप्लांट के तले पलते हैं डेंगू के लार्वा 

भिलाई मेें डेंगू रोकथाम के लिए बनी ब्रीडिंग चेकर टीम ऐसे स्थलों से लार्वा खोजकर नष्ट कर रहीं जहाँ आमतौर पर लोगों को यकीन करना मुश्किल है कि यहाँ भी इनके पनपने की आशंका हो सकती है। भिलाई में सेक्टर 1 के निवासी केएन राव ने अपने आँगन में खूबसूरत नीलकमल लगाया था। डेंगू की रोकथाम करने वाली ब्रीडिंग चेकर टीम जब पहुँची तो उसने उस छोटी सी टंकी का निरीक्षण भी किया जिसमें नीलकमल लगाया गया था। उन्होंने राव दंपत्ति को दिखाया कि किस प्रकार इसमें मच्छर के लार्वा पैदा हो रहे हैं। राव दंपत्ति ने कहा कि वे सोच भी नहीं सकते थे कि साफ पानी में भी लार्वा पनप सकते हैं। 
शहरों में नीलकमल, मनीप्लांट आदि पौधे लगाए जाते हैं जिसमें साफ पानी भरा होता है। बीते दिनों हुई बारिश के बाद इस संबंध में आशंका और बढ़ी है कि घर के कोनों पुराने टायर, घड़ों, गमलों, टंकियों में जलभराव फिर हो गया हो। ब्रीडिंग चेकर टीम द्वारा इन सबको बारीकी से देख कर डेंगू नियंत्रण के अपने कार्यक्रम पर प्रभावी रूप से अमल किया जा रहा है। इसके बाद ब्रीडिंग चेकर दस्ते द्वारा टब में टेमीफास दवा डाली गई और डेंगू बचाव के उपाय भी बताए गए।इस घटना के बाद राव दंपत्ति ने उनको आगाह करने के न केवल टीम का शुक्रिया अदा किया। श्रीमती राव ने कहा कि नील कमल तो फिर आ जाएगा मगर जिंदगी वापिस नहीं मिलेगी। इस परिवार की तरह ही कई लोगों ने सोचा ही नहीं होगा कि कमल और मनीप्लांट का जो पौधा उन्होंने अपने गार्डन और घर की खूबसूरती के लिए लगाया लगाया है वो डेंगू के मच्छर के प्रजनन की जगह होगा। श्रीमती राव ने कहा कि नील कमल तो फिर आ जाएगा मगर जिंदगी वापिस नहीं मिलेगी। इस दौरान एक घर से एक बाल्टी मिली जिसमें बारिश का पानी जमा हुआ था और सैकड़ों लार्वा मौजूद थे। ब्रीडिंग चेकर्स द्वारा आसपास के सभी लोगों को दिखाया गया कि ये लार्वा कैसे होते हैं। उनके लिए यकीन कर पाना मुश्किल था कि वो अपने घर में ही डेंगू के मच्छर के लिए दावत का इन्तजाम कर रहे हैं। 


यह कैसे काम करता है – 

ब्रीडिंग चेकर दस्ता डीएमओ डॉ एस के मंडल ने बताया ब्रीडिंग चेकर्स दस्ते पहला उद्देश्य है सोर्स रिडक्शन अर्थात डेंगू के मच्छर का प्रजनन रोकना ताकि रोग का फैलाव रोका जा सके। इसके लिए टीम ने आस पास के सभी घरों में दस्तक दी और घर का हर वो कोना खंगाला जहाँ भी डेंगू के लार्वा होने की संभावना होती है। ब्रीडिंग चेकर्स घर घर जाकर साफ पानी की टंकियां,छतों में पड़े खाली मटके और बर्नियां, टायर, बोतलें , बाल्टियां कूलर आदि में जमा पानी की जांच करते हैं।जमा हुए पानी में लार्वा की मौजदूगी की जांच की जाती है। फिर उस पानी में टेमीफास दवा मिला दी जाती है ताकि लार्वा नष्ट हो जाए।साथ ही घर में चारों तरफ मच्छर नाशक दवा का छिड़काव किया जाता है। ब्रीडिंग चेकर्स के 4 दस्ते हर सुबह घर घर जाकर इस काम को अंजाम दे रहे हैं।

 

कूलर में लार्वा नष्ट करने टेमीफास डालते हुए

नगर निगम भिलाई द्वारा एक लाख से अधिक टेमीफास की बोतल का वितरण – 

नगर निगम भिलाई के स्वास्थ्य अधिकारी धर्मेंद्र मिश्र ने बताते हैं कि डेंगू के लार्वा नष्ट करने के लिए निगम द्वारा टेमीफास दवा को तरल घोल रूप में घर घर जाकर वितरित किया जा रहा है। अब तक 1 लाख से अधिक बोतलों का वितरण किया जा चुका है। इसके अलावा निगम के कर्मचारी व्यस्क मच्छर को नष्ट करने के लिए मेलाथियान का छिड़काव भी कर रहे हैं।
जागरूकता अभियान में शामिल होने आगे आ रहे हैं नागरिक
डेंगू के खिलाफ लड़ाई के लिए लोगों को एकजुट होना होगा। जब ब्रीडिंग चेकर दस्ता भिलाई सेक्टर 1 निवासी श्री नसीम के घर पंहुचा तो उन्होंने भी डेंगू के लिए जागरूकता अभियान में शामिल होने की इच्छा जाहिर की है।उन्होंने बताया कि वे एक रक्तदाता समूह से जुड़े हैं जिसमें 500 सेअधिक सदस्य हैं। सभी सदस्य नियमित रूप से रक्तदान करते तो कते ही हैं लेकिन अब वो अपने समूह के साथ मिलकर डेंगू के प्रति लोगों को जागरूक भी करेंगे। 
उन्होंने स्वयंसेवी समूहों, सामाजिक संगठनों और युवाओं से भी अपील की है कि इस अभियान में सहयोग करें ताकि बड़ी आबादी को कवर किया जा सके। 
रुका हुआ साफ पानी है डेंगू का घर, लोगों को मिल रही सीख
सेक्टर 1 निवासी श्रीमती रंजीत कौर ने बताया कि पिछले साल उनकी बेटी को डेंगू हुआ था। उन्होंनेभी इस घटना से सबक लिया और अपने घर में जाकर जमा पानी,कूलर,मनी प्लांट की बोतल,फ्रिज के पीछे का का कंटेनर का पानी फेंका। सेक्टर-1 की ही शोभा दुबे ने बताया कि उनके पति को भी पिछले साल डेंगू हुआ था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब उनको बचाव के उपाय बताए उन्होंने दुबारा चूक नहीं की। श्रीमती दुबे एक दिन के अंतराल में घर में साफ पानी के सभी बर्तनों, टंकियों कूलरों की सफाई कर पानी बदलती हैं और मच्छरदानी का उपयोग करती हैं। एक छोटी बच्ची परी भी इस अभियान में जुड़ीं, 7 साल की नन्हीं परी ने कहा कि वो अपने दोस्तों को बताएंगी कि डेंगू से बचने के लिए जब खेलने जाएं तो पूरी बाँह के कपड़े पहने और मच्छरदानी के अंदर सोएँ।

डेंगू मच्छर


लंबे समय से खाली पड़े मकान हैं डेंगू मच्छर का ठिकाना
डॉ मंडल बताते हैं कि वर्षों से बंद पड़े सूने मकान इस अभियान में बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं।  इन बंद घरों में अंधेरे कोनों, झाड़ियों पानी की टंकियों में डेंगू के मच्छर के पनपने लिए अनुकूल वातावरण होता है। इसलिए उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि अगर उनका का किसी परिचित का मकान वर्षों से खाली हैं तो घर की साफ सफाई करा लें। इन मकानों में अनिवार्य रूप से नल कनेक्शन कटवा लें ताकि पानी जमा न हो सके।
बारिश के बाद रखें सावधानी
बारिश के बाद अक्सर पुराने मटकों टायरों, आसपास के गड्ढों,कंस्ट्रक्शन साइटों में पानी जमा ही जाता है । लार्वा को पनपने से रोकने के लिए जला हुआ तेल या टेमीफास दवाई डालें। डॉ मंडल ने बताया कि आने वाले 2-3 महीनों में सजग रहना जरूरी है। रुक रुक कर हो रही बारिश भी एक चुनौती है। बारिश से दवा बह जाती है। इसलिए बारिश के फिर से मेलाथियान और टेमीफास का छिड़काव जरूरी है। 

आम नागरिकों से है सहयोग की अपील भी – 

ब्रीडिंग चेकर दस्ते के सुपरवाईजर लकी दुबे बताते हैं कि कई बार उनको लोगों के रोष का सामना भी करना पड़ता है।ऐसी स्थिति में संयम बरकरार रखना पड़ता है। कई बार जब दस्ता दवा का छिड़काव करने या जाँच करने पंहुचता है तो लोग कहते हैं परेशान करने आ जाते हो। हमको दवाई की बदबू आती है। इसके टीम सदस्य समझाते हैं कि ये अभियान उनकी सुरक्षा के लिए है। यह बात समझनी जरूरी है कि डेंगू से सुरक्षा का उपाय स्वयं घर से ही शुरू होता है। डेंगू से बचाव और रोकथाम के लिए शासन और प्रशासन के प्रयास तभी सफल होंगे जब नागरिकों का सहयोग मिलेगा। 

डेंगू के रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए उपाय – 

डेंगू बुखार एक आम संचारी रोग है जिसकी मुख्य विशेषताए है तीव्र बुखार, अत्यधिक शरीर दर्द तथा सिर दर्द। 
यह एक ऐसी बीमारी है जो काफी होती है और समय-समय पर इसे महामारी के रूप में देखा जाता है। वयस्को के मुकाबले, बच्चो में इस बीमारी की तीव्रता अधिक होती है. यह बीमारी यूरोप महाद्वीप को छोड़कर पूरे विश्व में होती है तथा काफी लोगों को प्रभावित करती है। इस बीमार से बचाव फैलने से रोकथाम और नियंत्रण ही है। ‘डेंगू’ वायरस द्वारा होता है जिसके चार विभिन्न प्रकार है। आम भाषा में इस बिमारी को ‘हड्डी तोड़ बुखार’ कहा जाता है। क्योंकि इसके कारण शरीर व जोड़ों में बहुत दर्द होता है।

डेंगू फैलता कैसे है  –

मलेरिया की तरह डेंगू बुखार भी मच्छरों के काटने से फैलता है. इन मच्छरो को ‘एडीज मच्छर’ कहते है जो काफी ढीठ व ‘साहसी’ मच्छर है और दिन में भी काटते हैं। भारत में यह रोग बरसात के मौसम में तथा उसके तुरन्त बाद के महीनों (अर्थात् जुलाई से अक्टूबर) में सबसे अधिक होता है। 
डेंगू बुखार से पीड़ित रोगी के रक्त में डेंगू वायरस काफी मात्रा में होता है। जब कोई एडीज मच्छर डेंगू के किसी रोगी को काटता है तो वह उस रोगी का खून चूसता है। खून के साथ डेंगू वायरस भी मच्छर के शरीर मे प्रवेश कर जाता है। मच्छर के शरीर मे डेंगू वायरस का कुछ और दिनों तक विकास होता है। 
जब डेंगू वायरस युक्त मच्छर किसी अन्य स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो वह डेंगू वायरस को उस व्यक्ति के शरीर में पहुँचा देता है। इस प्रकार वह व्यक्ति डेंगू वायरस से संक्रमित हो जाता है तथा कुछ दिनों के बाद उसमें डेंगू बुखार रोग के लक्षण प्रकट हो सकते है। 

संक्रामक काल – 

जिस दिन डेंगू वायरस से संक्रमित कोई मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो उसके लगभग 3 से 5 दिनोों बाद ऐसे व्यक्ति में डेंगू बुखार के लक्षण प्रकट हो सकते है. यह संक्रामक काल 3 से 10 दिना तक भी हो सकता है। 

डेंगू बुखार के लक्षण – 

डेंगू बुखार तीन प्रकार के होते हैं – क्लासिकल (साधरण) डेंगू बुखार, डेंगू हॅमरेजिक बुखार और डेंगू शॅाक सिन्ड्रोम। क्लासिकल (साधरण) डेंगू बुखार एक स्वयं ठीक होने वाली बीमारी है तथा इससे मृत्यु नहीं होती है लेकिन यदि डी.एच.एफ. तथा डी.एस.एस. का तुरन्त उपचार शुरू नहीं किया जाता है तो वे जानलेवा सिद्ध हो सकते है। 
साधरण डेंगू बुखार है या डी. एच. एफ.अथवा डी.एस.एस. है. निम्नलिखित लक्षणों से इन प्रकारों को पहचानने में काफी सहायता मिलेगी। 
क्लासिकल (साधरण) डेंगू बुखार – 
ठंड लगने के साथ अचानक तेज, बुखार चढ़ना, सिर, मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना. आंखों के पिछले भाग में दर्द होना जो आंखों को दबाने या हिलाने से और भी बढ़ जाता है। 
अत्यधिक कमजोरी लगना, भूख में बेहद कमी तथा जी मितलाना, मुँह के स्वाद का खराब होना, गले में हल्का सा दर्द होना, रोगी बेहद दुःखी तथा बीमार महसूस करता है. शरीर पर लाल ददोरे (रैश) का होना, शरीर पर लाल-गुलाबी ददोरे निकल सकते है। 
चेहरे, गर्दन तथा छाती पर विसरित (डिफ्यूज) दानों की तरह के ददोरे हो सकते है. बाद में ये ददोरे और भी स्पष्ट हो जाते है। 
साधरण (क्लासिकल) डेंगू बुखार की अवधि लगभग 5 से 7 दिन तक रहती है और रोगी ठीक हो जाता है। अधिकतर मामलों में रोगियों को साधरण डेंगू बुखार ही होता है. 
डेंगू हॅमरेजिक बुखार (डी.एच.एफ.) यदि साधरण (क्लासिकल) डेंगू बुखार के लक्षणों के साथ-साथ, निम्नलिखित लक्षणों में से एक भी लक्षण प्रकट होता है तो डी.एच.एफ. होने का शक करना चाहिए। 
नाक, मसूढों से खून जाना, शौच या उल्टी में खून जाना, त्वचा पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे या बडे चिकत्ते पड़ जाना आदि रक्स्राव (हॅमरेज) के लक्षण है। 
यदि रोगी की किसी स्वास्थ्य कर्मचारी द्वारा ‘‘टोर्निके टैस्ट’’ किया जाये तो वह पाॅजिटिव पाया जाता है. प्रयोगशाला में कुछ रक्त परीक्षणों के आधार पर निदान की पुष्टि की जा सकती है। 
डेंगू शाॅक सिन्ड्रोम (डी.एस.एस.)
इस प्रकार के डेंगू बुखार में डी.एच.एफ. के बताए गये लक्षणों के साथ-साथ ‘‘शाॅक’’ की अवस्था के कुछ लक्षण भी प्रकट हो जाते हैं। डेंगू बुखार में शाॅक के लक्षण ये होते हैं- रोगी अत्यधिक बेचैन हो जाता है और तेज बुखार के बावजूद भी उसकी त्वचा ठंडी महसूस होती है। रोगी धीरे-धीरे होश खोने लगता है। यदि रोगी की नाड़ी देखी जाए तो वह तेज और कमजोर महसूस होती है. रोगी का रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) कम होने लगता है।

डेंगू का उपचार – 

यदि रोगी को साधरण (क्लासिकल) डेंगू बुखार है तो उसका उपचार व देखभाल घर पर की जा सकती है। चूंकि यह स्वयं ठीक होने वाला रोग है इसलिए केवल लाक्षणिक उपचार ही चाहिए. उदाहरण के तौर पर स्वास्थ्य कर्मचारी की सलाह के अनुसार पेरासिटामाॅल की गोली या शरबत लेकर बुखार को कम रखिए. रोगी को डिसप्रिन, एस्प्रीन कभी ना दें। यदि बुखार 102 डिग्री फैरनहाईट से अधिक है तो बुखार को कम करने के लिए हाइड्रोथेरेपी (जल चिकित्सा) करे. सामान्य रूप से भोजन देना जारी रखें। बुखार की स्थिति मे शरीर को ओर अधिक भोजन की आवश्यकता होती है। रोगी को आराम करने दें. 
यदि रोगी में डी.एच.एफ. एवं डी.एस.एस. की ओर संकेत करने वाला एक भी लक्षण प्रकट होता नजर आए तो शीघ्रतिशीघ्र रोगी को निकटतम अस्पताल में ले जाए, ताकि वहाँ आवश्यक परीक्षण करके रोग का सही निदान किया जा सके और आवश्यक उपचार शुरू किया जा सके. (जैसे कि द्रवों या प्लेटलेट्स कोशिकाओं को नस से चढाया जाना). 
प्लेटलेट्स एक प्रकार की रक्त कोशिकाएँ होती है जो डी.एच.एफ. एवं डी.एस.एस. कम हो जाती है. यह भी याद रखने योग्य बात है कि डेंगू बुखार के प्रत्येक रोगी की प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता नहीं होती है। 

डेंगू का रोकथाम – 

डेंगू बुखार की रोकथाम सरल, सस्ती तथा बेहतर उपचार हेतु आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए. एड़ीज मच्छरों का प्रजनन (पनपना) रोकना और एडीज मच्छरोों के काटने से बचाव करना चाहिए। 

एडीज मच्छरों का प्रजनन रोकने के लिए उपाय – 

मच्छर केवल पानी के स्रोतोों मेें ही पैदा होते हैं जैसे कि नालियोों, गड्ढों, रूम कूलर्स, टूटी बोतलों, पुराने टायर्स व डिब्बा तथा ऐसी ही अन्य वस्तुओं में जहाँ पानी के जमाव होता है। 
अपने घर और उसके आस-पास पानी एकत्रित न होने दें. गड्ढों को मिट्टी से भर दें. रूकी हुई नालियों को साफ कर दें. रूम कूलरों तथा फूल दानों का सारा पानी सप्ताह में एक बार पूरी तरह खाली करे दें, उन्हें सुखाएँ तथा फिर से भरें. खाली व टूटे-फूटे टायरों, डिब्बों तथा बोतलों आदि का उचित विसर्जन करें. घर के आस-पास सफाई रखें। पानी की टंकियों तथा बर्तन को सही तरीके से ढक कर रखें ताकि मच्छर उसमें प्रवेश ना कर सके और प्रजनन न कर पायें। यदि रूम कूलरों तथा पानी की टंकियों को पूरी तरह खाली करना संभव नही है तो यह सलाह दी जाती है कि उनमे सप्ताह में एक बार पेट्रोल या मिट्टी का तेल डाल दें। प्रति 100 लीटर पानी के लिए 30 मि0 लि0 पेट्रोल या मिट्टी का तेल पर्याप्त है. ऐसे करने से मच्छर का पनपना रूक जायेगा। पानी के स्रोतों में आप कुछ छोटी किस्म की मछलियाँ (जैसे कि गैम्बुसिया, लेबिस्टर) भी डाल सकते है. ये मछलियाँ पानी मे पनप रहे मच्छरों व उनके अण्डों को खा जाती है। इन मछलियों को मत्स्य विभाग अथवा निजी हेचरियों से प्राप्त किया जा सकता है. यदि संभव हो तो खिड़कियों व दरवाजों पर महीन जाली लगवाकर मच्छरों को घर मे आने से रोकें। मच्छरों को भगाने व मारने के लिए मच्छर नाशक क्रीम, स्प्रे, मैट्स, कॅाइल्स आदि प्रयोग करें. गूगल के धुएँ से मच्छर भगाना एक अच्छा देशी उपाय है. रात में मच्छरदानी के प्रयोग से भी मच्छरों के काटने से बचा जा सकता है। सिनेट्रोला तेल भी मच्छरों को भगाने में काफी प्रभावी है. ऐसे कपडे़ पहनना ताकि शरीर का अधिक से अधिक भाग ढका रहे. यह सावधनी बच्चों के लिए अति आवश्यक है। बच्चो को मलेरिया सीजन (जुलाई से अक्तूबर तक) में निक्कर व टी-शर्ट ना ही पहनाएं तो अच्छा है। 
मच्छर-नाशक दवाई छिड़कने वाले कर्मचारी जब भी यह कार्य करने आयें तो उन्हे मना मत कीजिए. घर में दवाई छिड़काना हित में है. घर के अन्दर सभी क्षेत्रों में सप्ताह मे एक बार मच्छर-नाशक दवाई का छिडकाव अवश्य करें. यह दवाई फोटो-फ्रेम, परदो, कलैण्डरों आदि के पीछे तथा घर के स्टोर कक्ष व सभी कोनों में अवश्य छिड़कें. दवाई छिड़कते समय अपने मुहँ व नाक पर कोई कपडा अवश्य बाँध लें तथा खाने पीने की सभी वस्तुओं को ढक कर रखें। फ्रिज के नीचे रखी हुई पानी इकट्ठा करने वाली ट्रे को भी प्रतिदिन खाली कर दें। अपने घर के आस-पास के क्षेत्र में सफाई रखें. कूड़ा-करकट इधर-उधर ना फेकें. घर के आस-पास जंगली घास व झाडियाँ आदि न उगने दें. ये मच्छरों के लिए छिपने व आराम करने के स्थलों का कार्य करते हैं। यदि आपको लगता है कि आपके क्षेत्र में मच्छरों की संख्या में अधिक वृद्धि हो गयी है या फिर बुखार से काफी लोग ग्रसित हो रहे है तो अपने स्थानीय स्वास्थ्य केन्द्र, नगरपालिका या पंचायत केन्द्र मे अवश्य सूचना दें। 
एडीज मच्छर दिन में भी काट सकते है. इसलिए इनके काटने से बचाव के लिए दिन में भी आवश्यक सावधनियाँ बरतें। यदि किसी कारणवश दरवाजों व खिड़कियों पर जाॅली लगवाना संभव नहीं है, तो प्रतिदिन पूरे घर मे पायरीथ्रम घोल का छिड़काव करें। 
डेंगू बुखार सर्वाधिक रूप से जुलाई से अक्तूबर माह के बीच की अवधि में होता है क्योंकि इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ होती है। इसलिए इस मौसम में हर सावधनी बरतनी चाहिए. अंत में एक सलाह और डेंगू बुखार से ग्रस्त रोगी को बीमारी के शुरू के 6 से 7 दिना में मच्छरदानी से ढके हुए बिस्तर पर ही रखें ताकि मच्छर उस तक ना पहुँच पाए। 
इस उपाय से समाज के अन्य व्यक्तियों को डेंगू बुखार से बचाने में काफी सहायता मिलेगी। 

– घनश्याम बैरागी  भिलाई  ( छत्तीसगढ़ ) 
  Mo. 08827676333 ( Watsapp ) 


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