“मितानिन” छत्तीसगढ़ में पिछले दो दशक से एक अनुकरणीय उदाहरण।


‘मितानिन’ मतलब देश के अन्य राज्यों में “आशा कार्यकर्ता”अर्थात स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता

मितानिन के कार्य सेवा और समर्पण से  मिल रही आम लोगों को संतुष्टि. छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य की बेहतर स्थिति हुई है,एवं  शिशु-मातृ मृत्यु दर में काफी कमी आयी है. 

दुर्ग मेें गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ग्राम पंचायत निकुम के स्वास्थ्य पंचायत सम्मेलन में दुर्ग विकासखंड के 445 मितानिनों को संबोधित करते हुए कहा कि मितानिनों का कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा करना है। सेवा के कार्य में सर्वाधिक समर्पण की जरूरत होती है। जितना समर्पण से सेवा किया जाएगा उतना ही लाभ जनता को मिलेगा और लोगों का जीवन बेहतर होगा। छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री का ‘मितानिन’ स्वास्थ्य सेवा-कार्यकर्ताओं के बीच जाना, उनके उत्साह को बढ़ावा देना ही है। फिर भी सरकार ‘मितानिन’ के भविष्य के लिए सोचें जो सिर्फ सेवा ही कर रहीं हैं! जिन्हे सरकार के विभिन्न विभाग के द्वारा सिर्फ प्रशिक्षण दिया जाता है। जबकि, जीविकोपार्जन की जद्दोजहद वे सेवा के साथ स्वयं करती रहीं हैं? यहाँ यह बताना लाजमी होगा, छत्तीसगढ़ में “मितानिन” कार्यक्रम को दो दशक का समय हो गया। ‘मितानिन’ मतलब देश के अन्य राज्यों में “आशा कार्यकर्ता”। जब आज से 20 वर्ष पहले, अविभाजित दुर्ग जिले ( आज है दुर्ग, बालोद, बेमेतरा जिला ) के ही गुण्डरदेही विकासखण्ड को ही ‘मितानिन’ मॉडल कार्यक्रम के लिए चुना गया था। आज यह सफलता पूरे छत्तीसगढ़ में एक लाख से अधिक ग्रामीण और शहरी ‘मितानिनों’ की सच्ची निष्ठा और लगन से काम का ही नतीजा है। 

जनता के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रयासरत मितानिन

पिछले दो दशक में ‘मितानिन’ सिर्फ सेवा ही तो कर रही है। जीवन के लिए स्वास्थ्य बड़ी जरूरत है। ऐसे जीवन जिया जाये जिससे बीमार ही न पड़े। बीमार होने का मूल कारण जीवन यापन में बदलाव का नतीजा है। खानपान में बदलाव, प्रदूषित जीवन के कारण बीमार हो रहे है। आधुनिकतावाद, भौतिकवाद, दिखावा और पाश्चात्य जीवन शैली से बचना चाहिए। यही जागरूकता का काम छत्तीसगढ़ में ‘मितानिनें’ कर रहीं है। 
बीमार होकर दवाई खाने के बजाय बीमार ही न पड़े। ऐसे जीवन व खान पान को अपनाना होगा। इसके लिए सभी परिवारों और लोगों को ग्रामीण संस्कृति व जीवनशैली को अपनाना  होगा। स्वास्थ्य सबके लिए सर्वोपरि है और इसके लिए  सभी लोगों को सभी परिवारों को सचेत होकर जागरूक होना होगा। यह कार्य बेहतर तरीके से ‘मितानिन’ ही तो कर रहीं हैं। 

दुर्ग में मितानिन सभा


छत्तीसगढ़ में ‘मितानिन’ बहनें बहुत बेहतरीन ढंग से ग्रामीण स्वास्थ्य के क्षेत्र में सेवा दे रही है। ‘मितानिन’ हमेशा आगे आकर काम करती हैं। हमेशा उदारतापूर्वक काम करतीं है। ‘मितानिन’, गाँव में  स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहत्तर कार्य कर रही है। गर्भवती माताओं को समुचित व बेहत्तर स्वास्थ्य व उपचार में अपना अमूल्य योगदान दे रही है। जो समाज के बेहत्तरी के लिए अमूल्य कृति है। 
‘मितानिन’, हमेशा कार्य के प्रति समर्पित रहीं है और आगे आकर काम करती रही हैं। जो समाज के अन्य क्षेत्रों में कार्य कर रहे लोगों के लिए अनुकरणीय उदाहरण है। वे अपना सेवा उदारता व सेवा भाव से करती हैं। गाँवो में स्वास्थ्य की दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है। उनके इस प्रयास से गाँवों में स्वास्थ्य बेहत्तर हुआ है। ‘मितानिनों’ के सेवा से ही गाँवों में अनेक प्रकार की योजनाओं और सेवाओं को आम जनता तक पहुँचाने में भी मदद मिली है। 
यह “मितानिन” छत्तीसगढ़ में पिछले दो दशक से एक अनुकरणीय उदाहरण है। 

लेखक – घनश्यामदास वैष्णव बैरागी 


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