भाई-बहन का प्यार है आज—ढेरों शुभकामनाएँ।।


प्रेषक एवं रचनाकार —-घनश्यामदास वैष्णव बैरागी (Ghanshyam G. Bairagi)

 भाई दूज का त्यौहार  

एक मिलन की चाह
बहन की,
ऐसा प्यार कभी न देखा।
भाई-दूज पर्व है आया,
देखो सैकड़ों खुशियाँ लाया।।
भाई के घर बहन आई,
दूध-मलाई बरफी लाई।
मां-बाप ने देखे सपने,
बच्चे हमारे साथ हों अपने।।
आज दिखी है वही बानगी।
भाई-दूज,
दिन शुभ है आ गयी।।
बंधे धागे एक
कच्चे-पक्के सब,
बुढ़े-बच्चे सबरंग अनेक।
खुशियाँ हैं फिर भी तो एक।।
भाई-दूज का दिन भी एक।
आओ मिलकर बांटे खुशियाँ।।
मित्र-मंडली
सखी-सहेलियाँ,
ऐसा दिन और ऐसा प्यार।
देख के गदगद्
हो गई अँखियाँ,
ऐसा प्यार कभी ना देखा।।
प्यार देखो
ऐसी है खुशियाँ,
भाई-बहन की भीगी अँखियाँ।
गम नहीं यह
खुशी रह जाए,
भाई-दूज बस ;
फिर से आ जाए।।

– घनश्यामदास वैष्णव बैरागी

  नंदिनी नगर भिलाई (छत्तीसगढ़)
  08827676333


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