व्यापारी या निजी कारोबारी उपेक्षित क्यों ?


    व्यापारी या निजी कारोबारी देश की अर्थवयवस्था की रीढ़ होता है,सर्व समाज का पोषक होता है, बेरोजगार- जिसे कहीं भी रोजगार नहीं मिलता उसके लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराता है. फिर भी समाज में इसे कभी सम्मान नहीं दिया जाता. अधिकतर शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों की पसंद इंजिनियर, डॉक्टर, वकील, सी.ऐ., साइंटिस्ट, आई.ए.एस. बनने की होती है, बहुत कम ही छात्र बिसनेस मेन बनने की चाह रखते होंगे, मगर क्यों?

    एक व्यापारी समाज के सभी वर्गों का पोषण करता है, वह बिना डिग्री, बिना जात पांत देखे,किसी भी व्यक्ति को उसकी कार्य क्षमता के अनुसार रोजगार देता है.जैसे अशिक्षित को झाड़ू पौछा,हिसाब किताब रखने वाले को उसकी योग्यता के अनुसार अकाउंटेंट, किसी भी स्नातक को सेल्स मेन, मशीन को सुधारने की योग्यता वाले को उसकी क्षमता के अनुसार कार्य दे देता है.जबकि सरकारी नौकरी में जात पात,उसकी एकेडमिक योग्यता, देख कर ही नौकरी दी जाती है,कॉर्पोरेट सेक्टर में भी सर्टिफिकेट देख कर जॉब दिया जाता है. परन्तु एक निजी कारोबारी सिर्फ व्यक्ति की कार्य क्षमता को देखकर उसे रोजगार दे देता है. असंगठित क्षेत्र में सर्वाधिक रोजगार वही उपलब्ध कराता है.

      व्यापारी अपने कार्यकाल में सरकार के लिए राजस्व जुटाने का कार्य करता है,समाज के सभी धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अपना योगदान देकर वित्तीय सहायक बनता है, प्रतिष्ठान के पास स्थानीय निवासियों में उपस्थित दबंग या गुंडा, शराबी की वित्तीय आवश्यक्ताओं को जाने अनजाने या मजबूरी वश पूर्ण करता है, सभी राजनैतिक दलों को चंदे में उसका सहयोग होता है,व्यापार से सम्बंधित सभी विभागों से अपने कार्य करवाने के लिए सबको नजराना देना उसकी नियति बन जाती है, क्योंकि वह  कितना भी नियमानुसार कार्य कर ले अथवा बही खाते ठीक प्रकार से तैयार कर ले,सभी प्रकार  के करों का भुगतान ईमानदारी से कर दे, फिर भी विभागीय कर्मियों या अधिकारियों को ‘भेंट’ दिए बिना उसका कोई कार्य समय पर नहीं होता. इस प्रकार व्यापारी समाज के सभी वर्गों की आवश्यकता के अनुसार उनका पोषण करता है. परन्तु फिर भी समाज उसे कोई सम्मान नहीं देता. अक्सर उसे गुनाहगार की नजरों से ही देखा जाता है.

       एक दुकानदार सवेरे से लेकर संध्या तक बिना समय देखे अपने कार्य में लिप्त रहता है,वह कभी नौ से पांच के समय में अपने को नहीं बांधता, वह सप्ताह के सातों दिन और माह के तीसों दिन समाज की सेवा में व्यस्त रहता है. उसके लिए परिवार, रिश्तेदारी या मित्रों के यहाँ आयोजित समारोह हो या दुःख दर्द,या कोई सामाजिक कार्य इत्यादि में उपस्थित होना भी उसके लिए अक्सर संभव नहीं हो पाता, वह अपनी बीमारी में डॉक्टर को दिखाने के लिए भी समय नहीं निकाल पाता.परिवार के कार्यों के लिए भी समय निकाल पाना उसके लिए टेढ़ी खीर होता है. अपने मनोरंजन या भ्रमण के लिए जीवन भर समय का अभाव रहता है. अपने प्रतिष्ठान में किसी कर्मचारी के अनुपस्थित होने पर उसके कार्य यथा संभव खुद ही करने लगता है और अपने प्रतिष्ठान के कार्य को निर्बाध रूप से चलते रहने के लिए प्रयासरत रहता है.

    सभी व्यवसायियों को वह सम्मान देता है जैसे वकील को वकील साहब, डॉक्टर को डॉक्टर साहेब, ऑफिस के कर्मियों को उसके पद के अनुसार उसे सम्मान देता है,समाज एक सभी वर्गों के वेतन और फी (आमदनी)उसके जेब से पूरे होते हैं,सरकार के खजाने भरने में सबसे बड़ा योगदान निजी व्यापारी या कारोबारी का होता है,परन्तु फिर भी एक दुकानदार को कोई सम्मान प्राप्त नहीं होता. उसको कोई साहब नहीं कहता वह सिर्फ दुकानदार ही रहता है. वह अपने जीवन का सर्वाधिक समय अपने व्यापार को बढाने में खपा देता है, एक व्यापारी या कारोबरी व्यापार की ऊँच, नीच,लाभ हानि, व्यापारिक स्थल पर चोरी डकैती, आगजनी, व्यापार के सभी अन्य जोखिम उठाता है, परन्तु फिर भी वह सबकी आँखों में खटकता रहता है. सभी उसे कामधेनु गाय समझकर हर समय उससे दूध निकालने के लिए तत्पर रहते हैं. समाज का प्रत्येक वर्ग,प्रत्येक व्यक्ति उसका शोषण करने को तैयार रहता है.

   सभी व्यापारियों से निवेदन है की वे अपने स्वाभिमान और आत्मसम्मान को बढ़ाएं.अपने कल्याण के लिए समाज और सरकार के समक्ष अपनी समस्याओं को रखें और अपने भविष्य को सुरक्षित करने की मांग करें. आप कभी भी अपने को किसी से कमतर न समझें.अपने सम्मान के लिए सभी मिलकर संघर्ष करें और सम्मान प्राप्त करें.आपको समाज उपेक्षित नहीं कर सकता.   


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