पूर्वोदय मिशन” से,स्थानीय उद्योगों को मिलेगा प्रोत्साहन


     प्रेषक —–घनश्यामदासवैष्णव बैरागी- भिलाई  (छत्तीसगढ़)

इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान द्वारा पूर्वोदय उद्घाटन

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के पूर्वी क्षेत्र की समृद्धि और विकास के लिए 2018 में एक दूरदर्शी पहल करते हुए “पूर्वोदय मिशन” का आह्वान किया था। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इस मिशन को आगे बढ़ाते हुए 11 जनवरी 2020 को कोलकाता में, “पूर्वोदयः एकीकृत इस्पात केंद्र के जरिये पूर्वी भारत का तीव्र विकास” लांच किया। प्रस्तावित एकीकृत इस्पात केंद्र में ओडिशा, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और उत्तरी आंध्र प्रदेश के राज्य शामिल हैं, जिनके जरिये पूर्वी भारत के त्वरित विकास की परिकल्पना की गई है। इस केंद्र का उद्देश्य लागत और गुणवत्ता दोनों के मामले में तेजी से क्षमता बढ़ाने और स्टील उत्पादकों की समग्र प्रतिस्पर्धा में सुधार करना होगा। देश में इस्पात के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “इस्पाती इरादा” अभियान शुरू करने के बाद धर्मेंद्र प्रधान के बहुमुखी क्षमता और नेतृत्व में इस्पात मंत्रालय की यह एक और बड़ी पहल है। इन पहलों के साथ, भारतीय इस्पात क्षेत्र भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

      स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने एक विशेष प्रोत्साहन योजना के जरिये देश भर में स्थित अपने संयत्रों के आसपास औद्योगिक ढांचे को बढ़ावा देने और समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास हासिल करने के लिए पूर्वोदय में अपनी भागीदारी की शुरुआत की है। “इस्पाती इलाकों का विकासः सेल के साथ” नाम की इस योजना का उद्देश्य उन जिलों का समग्र के लिए योगदान करना है, जहाँ ये संयंत्र स्थित हैं। इसके साथ ही यहाँ के स्थानीय उद्योगों की सहायता और विकास के जरिये आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा रोजगार पैदा करने के लिए एक उत्प्रेरक के तौर पर काम करना है।

        यह योजना सेल के भिलाई, राउरकेला, बोकारो, दुर्गापुर और बर्नपुर इस्पात संयंत्र के क्षेत्रों में स्थित स्थानीय एमएसएमई के लिए उन क्षेत्रों के लिए है, जहाँ विशेष मूल्य निर्धारण, विशेष वाणिज्यिक शर्तों, इनपुट की उपलब्धता, आसान वित्तपोषण सहायता और स्थानीय एमएसएमई को तकनीकी जानकारी प्रदान करके उन्हें यहाँ आने के लिए प्रोत्साहित करना है। सेल उन डैडमों के लिए इन्वेंट्री की व्यवस्था करेगा, जो स्कीम के तहत अपने मासिक उपभोग के आधार पर पंजीकृत हैं ताकि उन पर इन्वेंट्री रखने और बड़ी कार्यशील पूंजी की आवश्यकता का बोझ कम हो। इसके अलावा, गोदाम से डिलीवर किए जा रहे माल के लिए उसकी कीमत पर विशेष प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। इन प्रोत्साहनों के अलावा, डैडमों को उसी ब्रांच के बड़े ग्राहकों की ही तरह प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस योजना के तहत डैडमों के लिए 700-800 रुपये प्रति टन स्टील की राहत प्रदान करने की उम्मीद है। इन मूल्य आधारित प्रोत्साहनों के अलावा, सेल मात्रा आधारित टर्नओवर छूट, ब्याज मुक्त ऋण, नकद छूट और स्थिरता लाभ के साथ एक लचीली वार्षिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहा है। सस्ता फंड उपलब्ध कराने के लिए, सेल कंपनी की चौनल वित्तपोषण योजनाओं के लिए सुविधा प्रदान करेगा, जिसमें पात्र उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त हो सकता है। इन गैर-मूल्य आधारित प्रोत्साहनों में लगभग 200-400 रुपये प्रति टन की सीमा में लाभ के अवसर हैं। इन लाभों के अलावा, स्थानीय इस्पात संयंत्र कौशल विकास, ज्ञान वृद्धि, स्थानीय प्रचार और अन्य परामर्श आदि में मदद करेंगे। नए उद्योगों के लिए जो इन संयंत्र आधारित जिलों में आने जा रहे हैं, के लिए अतिरिक्त  प्रोत्साहन योजना द्वारा बढ़ाया जाएगा।

इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने 11 जनवरी, 2020 को कोलकाता में सीआईआई द्वारा आयोजित “पूर्वोदय सम्मेलन” के दौरान योजना का शुभारंभ करते हुए कहा, “ये योजनाएँ पूर्वांचल के राज्यों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की आगे की राह तय करेंगी तथा प्राकृतिक संसाधनों के धनी को इन राज्यों में सामाजिक और आर्थिक विकास को हासिल करने की आदर्श स्थिति का निर्माण करेंगी।” इस अवसर पर बोलते हुए, सेल अध्यक्ष अनिल कुमार चौधरी ने भी कहा था, “इस पहल के साथ सेल राष्ट्र निर्माण की अपनी इस विरासत को आगे भी जारी रखेगी”। ”उन्होंने उद्यमियों को इस पहल में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया और इस्पात क्षेत्रों के पास सर्वांगीण विकास के लिए इस्पाती इरादे के साथ सेल की मदद के लिए आगे आने को कहा।”

– घनश्यामदासवैष्णव बैरागी

  भिलाई  (छत्तीसगढ़)


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