छुआ छूत और जात पात ने ही हिन्दू धर्म के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा किया.


     हिन्दुओं में हजारों वर्षों से छुआ-छूत अर्थात जात-पात की कुप्रथा चली आ रही थी.जिसे बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर के प्रयासों से संविधान के माध्यम से विराम लगा दिया गया. जिसने एक तरफ हजारों वर्षों से जुल्मों का शिकार बनते आ रहे पद-दलित और शोषित जाति वर्ग को सम्मान से जीने का अवसर प्राप्त हुआ, दूसरी ओर हिन्दू धर्म को लगातार विशेष वर्ग के किये जाने वाले अमानवीय व्यव्हार के ग्रहण से मुक्ति मिली और हिन्दुओं को दुनिया में सम्मान प्राप्त करने का मौका मिला. वर्ना शोषित वर्ग द्वारा हिन्दू धर्म से विघटन होते होते शीघ्र ही इसके अस्तित्व के लिय खतरा उत्पन्न हो जाता.

      जो पद दलित तथाकथित निम्न वर्ग के लगातार शोषण का शिकार हो रहे थे,(उच्च वर्ग से जो लोग उनकी पीड़ा को नही समझ पा रहे हैं, उन्हें बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर पर आधारित टी वी धारवाहिक देखना चाहिए. उनके पूर्वजों ने शोषित वर्ग पर कितने अत्याचार किये थे) उस समय उन्हें सम्मान पूर्वक जीवन या तो मुस्लिम धर्म या ईसाई धर्म में दिखाई दे रहा था. अतः वे हिन्दू धर्म को त्याग कर मुस्लिम या ईसाई धर्मो को अपनाने को तत्पर हो रहे थे और यह कार्यक्रम सैकड़ों वर्षों तक चलता रहा. धर्मांतरण का एक दूसरा कारण देश में मुस्लिम और अंग्रेजों का शासन भी था. जिनसे प्रतारणा मिलने के कारण भी शोषित समाज के लोग एवं अन्य हिन्दू धर्म के लोग इन धर्मों को अपनाने को मजबूर हुए, इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता. परन्तु शोषित वर्ग तो स्वेच्छा से भी  अन्य  धर्मों को अपनाने के लिए प्रेरित होते रहे और इस प्रकार से हिन्दुओं की संख्या  निरंतर घटती रही. विदेशी शासन के अधीन होने के कारण समाज में व्याप्त कुरीतियों को हटाने के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ. विदेशियों ने तो समाज की कमजोरी का लाभ अपने धर्मानुयायियों को बढाने में उठाया. अपने धर्म का प्रचार-प्रसार किया और देश पर अपने शासन की पकड़ को  मजबूत  किया.

     पूर्व में हिन्दू धर्म की एक कमी यह भी रही की वह किसी अन्य धर्म से आये लोगों को नहीं अपनाता था. यद्यपि आज स्थिति बदल चुकी है. अब इस धर्म में भी अन्य धर्मों से आने वाले व्यक्तियों का स्वागत किया जाता है. परन्तु जबरन,लालच देकर या बहला फुसला कर धर्मांतरण नहीं किया जाता. हिन्दू धर्म में सभी अन्य धर्मों को भी बराबर सम्मान देने की परम्परा रही है.

       यह एक कटु सत्य है की आज समूचे पाकिस्तान, बंगला देश, और भारत के निवासी कुल मुसलमानों की आबादी में नब्बे प्रतिशत मुसलमान पूर्व में हिन्दुओं से परिवर्तित हैं अर्थात इन सबके पूर्वज हिन्दू ही थे. क्योंकि आक्रान्ता बहुत कम संख्या में देश में आये  थे, जिन्होंने देश पर कब्ज़ा कर लिया और अपने अपने धर्म का प्रचार प्रसार किया. हमारे देश में अधिकतम ईसाई भी हिन्दू से परिवर्तित किये हुए है. अतः यह बात सत्य है इस क्षेत्र(भारतीय उप महाद्वीप ) के अधिकतर मुसलमान हिन्दू धर्म से परिवर्तित हुए हैं.  आज ये परिवर्तित मुसलमान कुछ कठ मुल्लाओं और स्वार्थी राजनेताओं द्वारा भ्रमित किये जाने के कारण हिन्दुओं के प्रति आक्रोशित रहते हैं और अपने धर्म को देश और समाज से बड़ा मानते हैं. देश में सारे फसादों की जड़ यही है. हमारे देश के राजनेता समाज को विभाजित कर अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं. मुल्ला मौलवी अपने स्वार्थ में न तो इस कौम को पढने देते हैं और न ही विकसित होने देते हैं.बल्कि बार बार शरिया की दुहाई देते हुए अपने समाज को डराते हैं और हिन्दुओं के विरुद्ध जहर भरते रहते हैं. पाकिस्तान और बंगला देश(पहले यह भी पाकिस्तान का हिस्सा था) का उदय इसी नफरत के परिणाम स्वरूप हुआ. अब जो भी मुसलमान विभाजन के समय भारत में रह गए थे वे भी मात्र तीन करोड़ थे जो बढ़ कर आज सत्रह करोड़ हो गए हैं. जबकि उनके जीवन स्तर में अपेक्षाकृत उल्लेखनीय सुधार नहीं हो पाया. क्योंकि इन्हें पढाया जाता है औलाद अल्लाह की देन होती है, इसलिए अल्लाह के काम में दखल देना मुसलमान का धर्म नहीं होता. अतः इनकी जनसँख्या तेजी से बढ़ रही है,परिवार में बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण उनका  जीवन स्तर अन्य नागरिकों(गैर मुस्लिम) के मुकाबले गिरता जा रहा है.  उन्हें शिक्षा के लिए मदरसों में जाने को प्रेरित किया जाता है जिसमे धार्मिक कट्टरता के साथ साथ अन्य धर्मों के विरुद्ध शिक्षा दी जाती है, उन्हें दुनिया हो रहे नित नए विकास से दूर रखा जाता है. उनकी शिक्षित न होना या अल्प शिक्षित होना भी इसका बहुत बड़ा कारण है, जिसके कारण ये निम्न स्तर पर रहने को मजबूर होते हैं.

     किसी भी सभ्य समाज को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है आखिर अधिकतर मुस्लिम देशों में ही अराजकता का माहौल, दंगा फसाद क्यों होता है. दुनिया में आतंक फ़ैलाने वाले अधिकतर मुस्लिम ही क्यों होते हैं. क्यों उन्हें शांति पूर्ण जीवन प्रिय नहीं है. अक्सर सुना जाता है की इनके धर्म में बताया गया है की अन्य धर्म को मानने वाले काफ़िर होते हैं. अतः जब तक वे पूरी दुनिया को इस्लामी नहीं बना देंगे चैन से नहीं बैठेंगे. शायद इनके अनुसार जब दुनिया भर में इस्लाम हो जायेगा तब ये चैन से रहेंगे. क्या वे उस स्थिति के आने पर दूसरा जन्म लेंगे?

      प्रत्येक भारतवासी सर्व प्रथम भारतीय है उसके बाद वह अपने धर्म का अनुयायी. जिनके  पूर्वज  हिन्दू रहे हैं उन्हें हिन्दुओं से भाई चारा अपनाना चाहिए. अब परिस्थितिया बदल गयी हैं, अब इस धर्म में जातिगत भेदभाव समाप्त हो चूका है और सभी जाति  के लोगों के साथ सम्मान जनक व्यव्हार किया जाता है. अतः वे घर वापसी अर्थात हिन्दू धर्म में वापसी करने के लिए भी स्वतन्त्र हैं. सभी भारत के निवासी देश हित में मिल जुल कर रहें और सबके साथ न्याय पूर्ण व्यव्हार करें स्वयं सुख शांति से रहें और सबको भी शांति से रहने दें. और देश को प्रगति में अपना योगदान देकर अपने परिवार, अपने समाज और अपने देश को खुशहाल बनायें. किसी भी धर्म की उत्पत्ति मानव जीवन को आसान और सुविधा जनक बनाने के लिए हुई है न की इन्सान का जन्म धर्म के लिए होता है.

     यदि हिन्दू धर्म में छुआ छूत या भेद भाव न होता तो आज देश की भोगोलिक और सामाजिक स्थिति अधिक सुखद होती. माननीय आंबेडकर जी ने संविधान में उल्लेखनीय सामाजिक परिवर्तन का समावेश कर हिन्दू धर्म को विनाश से बचा लिया.(SA-254C)  


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