अभूतपूर्व महामारी में बदलती विचारधारा


आज जिस प्रकार से चीन से प्रसारित हुई कोरोना वायरस की भयानक बीमारी ने पूरे विश्व समुदाय को पस्त कर दिया है,वह अभूतपूर्व है. जो देश अपनी समृद्धि और ताकत पर गर्व करते थे आज वे भी इस बीमारी के सामने घुटने टेक चुके हैं. सारी  विश्व की अर्थव्यवस्था को गहरा आघात  लगा है. इस आपदा से निकलने के पश्चात भी पूरे विश्व की अर्थ व्यवस्था को सामान्य स्थिति तक लाने में अनेक वर्ष लग सकते हैं. बेरोजगारी, भुखमरी, आवश्यक वस्तुओं का अभाव मानव जाति  को बहुत समय तक व्यथित करेगा.

    हमारे देश में सरकार द्वारा उठाये गए सामायिक क़दमों की जीतनी सराहना की जाय कम है.परन्तु कुछ विपक्षी दल और कुछ विदेशी दुश्मनों के बहकावे में आने वाले जाहिल लोगों ने, सरकार की योजनाओं पर पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. ऐसे लोग वास्तव में मानवता के दुश्मन हैं.देश की जनता को ऐसे लोगों की नियत को समझना चाहिए और उनसे दूरी बना कर इनका बहिष्कार करना  जाना चाहिए.

     लगभग समस्त दुनिया में व्याप्त लॉक डाउन के माहौल में हो रहे परिवर्तन भी अभूतपूर्व हैं, जिनकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था. आईये देखते हैं इस दौरान होने वाले कुछ तथ्यात्मक परिवर्तन जिन्होंने हमारी विचारधारा ही बदल दी है,

1.अब अमेरिका विश्व का सबसे ताकतवर और अग्रणी देश नहीं रहा.क्योंकि कोरोना वायरस से निपटने में उसके पसीने छूट रहे हैं.और उसकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है.वह धन बल पर अपने नागरिकों की सुरक्षा नहीं कर पा रहा है.

2. विश्व में चीन की छवि ऐसी बन गयी है की वह कभी विश्व कल्याण की नहीं सोच सकता.बल्कि मानवता के विरुद्ध कार्य भी करता है.

3. यूरोपीय देश उतने शिक्षित और समझदार नहीं है, जितना उन्हें समझा जाता था.शायद इन देशों का अधिक विकसित होना ही इनके लिए अभिशाप बन गया है.कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के कारण ही वे इस बीमारी के प्रसार को नहीं रोक पा रहे हैं.

4, कोई पादरी, पुजारी, ग्रन्थी, मौलवी या ज्योतिषी एक भी रोगी को रोग से नहीं बचा सका. अतः धर्म की आस्था का जीवन प्रत्याशा से कोई समबन्ध नहीं है. बीमारी से यदि कोई बचा सकता ही तो वह है चिकित्सा विज्ञानं,चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी. वास्तव में असली ईश्वर इनमे ही व्याप्त है.

5, भारतीयों की रोग प्रतिरोधक क्षमता शेष विश्व के लोगों से बहुत ज्यादा है,अधिक आराम दायक और सुविधा जनक जीवन व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति को नष्ट कर देता है. यही कारण है की विकसित देश इस बीमारी से अधिक प्रभावित हुए हैं.

6. स्वास्थ्य कर्मी,पुलिस कर्मी, प्रशासन कर्मी ही असली हीरो हैं ना कि क्रिकेटर ,फिल्मी सितारे व फुटबाल प्लेयर,जिनको जनता अपनी पलकों पर बैठकर रखती है,इनको अपना आदर्श मानती है.

7,आज जिस प्रकार का खुला वातावरण वन्य जीवों को प्राप्त हुआ है वह अभूतपूर्व है, पहली बार पशुओं व परिन्दों को लगा कि यह संसार उनका भी है. उन्हें भी स्वतन्त्र रूप से विचरण करने का अधिकार है.

8,प्रदूषण में आयी कमी के कारण, विश्वास महानगरों  के बच्चों को पहली बार ज्ञात  हुआ की आसमान में तारे वास्तव में टिमटिमाते हैं.

9. लॉक डाउन के कारण नयी पीढ़ी को जंक फ़ूड की उपलब्धता बाधित होने के कारण पहली बार हम और हमारी सन्तान को अहसास हुआ की वे बिना ‘जंक फूड’ के भी जिन्दा रह सकते हैं. शाकाहारी भोजन द्वारा अधिक स्वस्थ्य रह सकते है. एक साफ-सुथरा-श्रेष्ठ व स्वच्छ-सहज-सरल जीवन जीना कोई कठिन कार्य नहीं है.

10. भोजन पकाना केवल स्त्रियां ही नहीं जानती, मौक़ा या मजबूरी पुरुषों को भी रसोई तक ले जा सकती है,वे भी एक अच्छे कुक बन सकते हैं. खाना बनाना कोई राकेट साइंस नहीं है.

11. हमारे देश का  मीडिया भी सकारात्मक भूमिका निभा सकता है और वाकई में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अभी मजबूती से खड़ा है, जो समय समय पर सरकार और देश के नागरिकों को अच्छे बुरे का आईना दिखाता हैं.

12. कुछ भारतीय अमीरों मे भी मानवता कूट-कूट कर भरी हुई है. कुछ कृतघ्नों को छोड़कर आज देश का सारा उद्योग जगत  देश के साथ खड़ा हैं और यथा संभव देश की जनता और सरकार को सहयोग दे रहा है. गरीब तबके के लोग भी मदद के लिए उनके पास जो कुछ है, उसे लुटाने को तैयार है, यह उनके राष्ट्र प्रेम को दर्शाता है.

13. आज सम्पूर्ण भारतवर्ष एकजुट होकर विश्व व्यापी भयावह बीमारी से लड़ रहा है (कुछ जमाती जाहिलो को छोड़कर) जिससे देश में  एकता में अनेकता की भावना प्रशस्त होती है.

   बुरा वक्त मानव और मानवता को और निखारता है,यह एक कडुवा सच है. कोरोना के दौर में कोई पैसे की बात नहीं कर रहा है, बल्कि लोग एक दूसरे की मदद के लिए आगे आ रहे हैं. एक तरह से देखा जाए तो कोरोना ने हमें इंसानियत का पाठ पढ़ाया है, और पैसे के पीछे ना भागने की सलाह दी है.क्योंकि धन दौलत से सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता,अन्यथा अमीर और विकसित देश अपने को लाचार और बेबस अनुभव नहीं करते.  

  

 


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